बलरामपुर : परिवहन निगम की खस्ताहाल बसें यात्रियों के सुहाने सफर में रोड़ा साबित हो रही हैं। बलरामपुर डिपो के बेड़े में पुरानी व जर्जर बसें बहुतायत मात्रा हैं। जिन पर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना चालक-परिचालक की नियत बन गई है। नतीजा आए दिन खटारा बसें बीच रास्ते में ही दगा दे जाती हैं, जिससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। परिवहन निगम के अफसर निर्धारित सीमा पार कर चुकी बसों को भी सड़कों पर दौड़ाने से बाज नहीं आ रहे। खटारा रोडवेज बसें गर्मी, सर्दी व बरसात सभी मौसम में यात्रियों के लिए कष्टदायक साबित होती हैं। किराये में तो बढ़ोतरी होती है लेकिन, संसाधनों को दुरुस्त करना अफसर मुनासिब नहीं समझते। जो किसी दिन बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है।

परिवहन निगम बलरामपुर-गोंडा मार्ग पर विभिन्न शहरों की जाने वाली 14 बसों के संचालन का दावा कर रहा है। जिसमें अधिकांश बसें जर्जर हैं। सोमवार को निर्माणाधीन बलरामपुर- गोंडा मार्ग पर अलग-अलग जगह तीन बसें खराब (ब्रेक डाउन) हो गईं। ऐसे में यात्रियों को घंटों जूझना पड़ा। राकेश कुमार, संदीप, छोटकऊ, देवेश कुमार ने बताया कि बस खराब होने के बाद गोंडा से बलरामपुर आने वाली अधिकांश बसों में क्षमता से अधिक यात्री बैठे रहे। जगह न होने के कारण खराब वाहन के यात्री उसमें स्थानांतरित (ट्रांसफर) नहीं हो सके। ऐसे में उन्हें निजी वाहन पर दोबारा किराया देकर आना पड़ा। सिविल लाइंस स्थित रोडवेज बस स्टेशन व वीर विनय चौराहे पर भी रोडवेज बस में क्षमता से अधिक यात्री बैठे दिखे। झारखंडी मंदिर के निकट खड़ी बस की सीटें फुल होने के बाद भी चालक वाहन रोककर सवारियां बिठाता रहा।

जबरन चढ़ जाती हैं सवारियां

-सहायक परिवहन अधिकारी हरेकृष्ण मिश्र का कहना है कि चालकों को बस में 54 से अधिक सवारियां न बैठाने का निर्देश दिया गया है लेकिन, स्टैंड पर खड़े यात्रियों के जबरन बस में चढ़ जाने की शिकायत मिलती है। बस ब्रेकडाउन होने पर यात्रियों को रोडवेज की दूसरी बस में बैठा दिया जाता है। बलरामपुर -गोंडा मार्ग जर्जर होने के कारण अक्सर बसें खराब हो जाती हैं।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस