बलरामपुर : हरितालिका तीज (कजरी तीज) को लेकर जिले भर के शिवमंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रहीं हैं। मंदिरों पर श्रद्धालुओं के साथ कांवड़ियों का भी हुजूम बुधवार को जलाभिषेक के लिए उमड़ेगा। नगर के झारखंडी मंदिर में जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पुरुष व महिला भक्तों की अलग-अलग कतार लगाने की व्यवस्था की गई। मंदिर के प्रधान पुजारी लालजी गिरि व विष्णु गिरि ने बताया कि भोर में चार बजे मंदिर का कपाट खोल दिया जाएगा। इसी तरह धर्मपुर गांव स्थित झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, गिधरैया गांव स्थित रेणुकानाथ मंदिर, राजापुर भरिया जंगल स्थित जंगली नाथ मंदिर पर कांवड़ियों का जत्था जलाभिषेक के लिए पहुंचेगा। जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है कजरी तीज :

-पंडित बजरंगी प्रसाद बताते हैं कि मान्यता है कि हरितालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। जो महिलाएं विधि-विधानपूर्वक व्रत करती हैं, वह अपने मन के अनुरूप पति को प्राप्त करती हैं। साथ ही यह दांपत्य जीवन में खुशी बरकरार रखने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है। बताया कि ¨लग पुराण की कथा के अनुसार मां पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में सती के रूप में भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर घोर तप किया। इस दौरान उन्होंने अन्न का सेवन नहीं किया। यह देखकर उनके पिता दक्ष प्रजापति अत्यंत दुखी थे। एक दिन देवर्षि नारद विष्णुजी की ओर से पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे। जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। दक्ष ने जब यह बात सती को बताई तो वह दु:खी होकर विलाप करने लगीं। फिर एक सखी की सलाह पर घने वन में जाकर गुफा में शिव की आराधना में लीन हो गईं। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र को देवी सती ने रेत से शिव¨लग का निर्माण कर भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें दर्शन देकर पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। उजड़ी गट्टियां बनेगी मुसीबत

-वीरविनय चौराहे से राजापुर भरिया जंगल को जाने वाले रास्ते पर उजड़ी गिट्टियां व गड्ढे कावड़ियों के लिए किसी परेशानी से कम नहीं है। कावड़ियों के पैर जख्मी हो सकते हैं। इसे लेकर प्रशासनिक अफसर तनिक भी गंभीर नहीं है।

Posted By: Jagran