बलरामपुर: ललिया क्षेत्र के रसईपुरवा में चल रही रामलीला में शनिवार को लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन किया गया। जब लक्ष्मण ने अपनी वीरता से मेघनाथ के छक्के छुड़ा दिए, तो उसने अपने प्राण की रक्षा के लिए शक्ति बाण का प्रयोग कर दिया। बाण लगते ही लक्ष्मण मूर्छित हो गए। हनुमान लक्ष्मण को गोद में उठाकर लाए। लक्ष्मण को बेहोश देख करुण विलाप करते हुए कहते हैं 'बोलो-बोलो लखन मेरे प्यारे, छोड़ मुझको चले बेसहारे। हे विधाता तेरा क्या बिगाड़ा, एक दु:खिया पे दु:ख ऐसे डारा। मेरा नइया डूबे बीच धारे हे खेवइया कहां तुम सिधारे। किसपे यूं वज्र भीषण गिरा है, किसका यूं छोटा भाई मरा है।' राम को रोते देख सभी की आंखें नम हो गईं। इसके बाद विभीषण की सलाह पर हनुमान लंका से सुषेन वैद्य को लाते हैं। उनके परामर्श पर हनुमान संजीवनी बूटी लाने जाते हैं, जहां से समूचा पर्वत उठा लाते हैं। उपचार के बाद लक्ष्मण की मूर्छा दूर होते ही रामादल में खुशी की लहर दौड़ जाती है। इसके बाद मेघनाद, अहिरावण व कुंभकर्ण वध का मंचन होता है। दशानन का वध होते ही समूचा पंडाल जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठता है। लंका विजय के उपरांत राम, लक्ष्मण, सीता व हनुमान अयोध्या लौटते हैं, जहां भरत उनका स्वागत करते हैं। रामलीला मंचन में बेचू, बड़कऊ, शिवकुमार, राधेश्याम, अयोध्या, ननके, बब्लू, पंकज, सियाराम का सराहनीय योगदान रहा।

Posted By: Jagran

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