बलरामपुर : सरकार के प्रतिबंध के बाद भी पॉलीथिन के उपयोग पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पॉलीथिन के दुष्प्रभावों से मानव जीवन व पर्यावरण को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई से पॉलीथिन व 15 अगस्त से थर्मोकोल के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली से सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है। जिले में पड़ोसी देश नेपाल से बेरोकटोक पॉलीबैग बाजारों में पहुंच रहे हैं। आमजन भी अपनी सहूलियत के लिए पॉलीथिन का बेहिचक उपयोग करते हैं। वहीं विभिन्न आयोजनों में मिट्टी, स्टील के बर्तनों व दोना-पत्तल की जगह थर्मोकोल की थाली, कटोरी व गिलासों का चलन बदस्तूर जारी है। नगर पालिका प्रशासन कागजों पर जागरुकता अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। नगर के प्रमुख स्थानों पर लगे होर्डिंग, बैनर को अनदेखा कर धड़ल्ले से पॉलीथिन व थर्मोकोल निर्मित वस्तुओं की खरीद-फरोख्त की जा रही है। जो मानव जीवन के साथ ही पशुओं व पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।

जिम्मेदार के बोल :

-अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार शुक्ल का कहना है कि पॉलीथिन व थर्माेकोल पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी एसडीएम व नगर निकाय प्रशासन को दुकानों पर छापेमारी अभियान व जागरुकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran