अमित श्रीवास्तव, बलरामपुर :

बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग की खींचतान में मासूमों की जान जोखिम में फंसी हुई है। 647 विद्यालय ऐसे चिह्नित हैं, जिनके परिसर या भवन के ऊपर से हाईटेंशन बिजली तार गुजर रहे हैं। इसे हटवाने के लिए चार माह पहले स्कूलों की सूची बिजली विभाग को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यहां बनी है अनहोनी की आशंका : रेहराबाजार क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नौवाकोल में बिजली का तार भवन पर लटक रहा है। जो कभी भी हादसे का सबब बन सकता है। प्रावि अचलपुर रूप के ऊपर हाईटेंशन का तार जाल है। तुलसीपुर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय साहबनगर के परिसर में डबल पोल पर ट्रांसफार्मर रखा है। परिसर में ही विद्युत खंभे लगाकर गांव को बिजली आपूर्ति की गई है। प्राथमिक विद्यालय शांतिपुरवा परिसर में भवन से सटा विद्युत खंभा लगा है। इस पर हाईटेंशन लाइन गांव में दौड़ाई गई है। प्राथमिक विद्यालय नचौरा परिसर के ऊपर तार निकला है। ये विद्यालय तो महज बानगी भर हैं। ऐसे स्कूलों की भरमार है, जिनके परिसर व अगल-बगल खंभे लगाकर हाईटेंशन लाइन खींची गई है। इन स्कूलों में हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

नहीं लिया सबक : उतरौला तहसील क्षेत्र के नयानगर विशुनपुर स्कूल भवन पर जुलाई में तार गिरा था। जहां करंट की चपेट में आने से 53 नौनिहालों की जान आफत में पड़ गई थी। घटना के बाद दोनों विभाग के अफसरों ने स्कूल परिसर से तार हटाने की कवायद कागजों में शुरू की जो धरातल पर नहीं दिखी।

वर्जन-

स्कूलों की सूची विद्युत विभाग को उपलब्ध करा दी गई थी। तार हटाने की सूचना विभाग ने अब तक नहीं दी है।

- हरिहर प्रसाद, बीएसए

Posted By: Jagran

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