सुलतानपुर : वाराणसी-सुलतानपुर फोरलेन निर्माण में लगी मैसर्स गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड को समय से कार्य पूरा न करने व अन्य अनियमितताओं को लेकर डिबार घोषित कर दिया गया है। साथ ही एनएचएआइ की तरफ से भविष्य में निर्माण (कांस्ट्रक्शन) कार्य को लेकर होने वाली निविदा में भी भाग न लेने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। यह फैसला गुणवत्ता निरीक्षण दल द्वारा लेखापरीक्षा के दौरान नियमित निरीक्षण के दौरान परियोजना कार्य में पाई जाने वाली कमियों को लेकर सौंपी गई रिपोर्ट के चलते लिया गया है।

केंद्र सरकार की तरफ से वर्ष 2015 में लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-56) के चौड़ीकरण को मंजूरी दी गई थी। 2016 में शुरू हुआ लखनऊ-सुलतानपुर चौड़ीकरण का कार्य अप्रैल 2019 में पूरा हो गया। केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी द्वारा उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोल भी दिया गया है। वहीं, करीब 15 सौ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सुलतानपुर से वाराणसी के 140 किमी फोरलेन का निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है। इसमें से 50 किमी की फोरलेन जिले की सीमा से होकर गुजरती है। एनएचएआइ की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान परियोजना कार्य में पाई जाने वाली कमियों को लेकर फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस बाबत ठेकेदार की तरफ से दिया गया उत्तर असंतोषजनक पाया गया।

एनएचएआइ के फील्ड अधिकारियों की जांच में कंक्रीट से बने फोरलेन के फुटपाथ में कई जगह दरारें पाई गईं। कार्य की खराब प्रगति व सुरक्षा उपायों की जमकर अनदेखी किए जाने की बात सामने आई। दिशा संकेतक व फर्नीचर गायब पाए गए। सड़क सुरक्षा से जुड़े मानकों का भी पालन किया जाता नहीं पाया गया। एनएचएआइ व फर्म के बीच होने वाले बार-बार समझौते की शर्तों का भी उल्लंघन किया जाता रहा। कार्यदायी संस्था की ओर से इसी साल अप्रैल में पूरा किए जाने का दावा भी गलत साबित हुआ।

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