अमित श्रीवास्तव, बलरामपुर :

हर साल गर्मी शुरू होते ही आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। आग में जलने से कई लोग गंभीर रूप से झुलस जाते हैं। विडंबना है कि बर्न यूनिट होने के बाद भी लोगों को बहराइच, गोंडा व लखनऊ भागना पड़ता है। अक्सर इलाज में देरी के कारण घायल को जान गंवानी पड़ जाती है। वजह, संयुक्त जिला चिकित्सालय में पांच साल से बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी यूनिट अब तक शुरू नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रशासन ने यूनिट को संसाधन से सुसज्जित करने के लिए फार्मासिस्ट तो तैनात कर दिया है, लेकिन चिकित्सक, स्टाफ नर्स व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। बावजूद इसके अधिकारी व जनप्रतिनिधि संवेदनहीन बने हैं।

-अग्निकांड में घायल होने वाले मरीजों के उपचार की जिले में कोई व्यवस्था नहीं है। जिला स्तरीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद इन मरीजों को गैर जनपद रेफर कर दिया जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर अक्सर उनकी मौत भी हो जाती है। ऐसे मरीजों को त्वरित उपचार मुहैया कराने के लिए 2013-14 में बर्न यूनिट बनाने को मंजूरी मिली थी। 2017 में संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में भवन भी बनकर तैयार हो गया, लेकिन संसाधन व कर्मियों के अभाव में संचालन शुरू नहीं हो सका। फार्मासिस्ट को बनाया प्रभारी :

अस्पताल प्रशासन ने बर्न यूनिट के भवन को तैयार करने के लिए इंजेक्शन काउंटर पर तैनात फार्मासिस्ट सैय्यद मोइज को बर्न एवं प्लास्टिक यूनिट का अतिरिक्त प्रभार दिया था। उनकी जिम्मेदारी तीन साल से बंद भवन की साफ-सफाई कराकर उसे संसाधनों से सुसज्जित करनी थी। वर्तमान में यह जिम्मेदारी फार्मासिस्ट पीके त्रिपाठी संभाल रहे हैं।

स्वास्थ्यकर्मी मिलते ही शुरू होगा संचालन :

- सीएमएस डा. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि बर्न यूनिट को सुसज्जित करने के लिए फार्मासिस्ट को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। साथ ही चिकित्सक व कर्मियों की तैनात के लिए शासन को पत्र भी भेज गया है। कर्मियों की तैनाती होते ही संचालन शुरू हो जाएगा।

Edited By: Jagran