हुनर ने बदली थारू महिलाओं की तकदीर, बलरामपुर में मूंज की डलिया बनाकर हर महीने कमा रही हैं 15 से 20 हजार
बलरामपुर में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत थारू समाज की महिलाएं मूंज से डलिया व अन्य उत्पाद बनाकर हर महीने ...और पढ़ें
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हुनर ने बदली महिलाओं की तकदीर।
HighLights
थारू महिलाएं मूंज से डलिया, मौनी बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने महिलाओं को हुनर विकास का प्रशिक्षण दिया।
महिलाएं मूंज उत्पादों से प्रतिमाह 15-20 हजार रुपये की आय कर रहीं।
चंद्र भूषण शुक्ल, बलरामपुर। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ग्रामीण योजना महिलाओं के किसी वरदान से कम नहीं है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं स्वयं का कारोबार कर 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं। इसकी बानगी विकास खंड गैंसड़ी के ग्राम पंचायत मोहकमपुर के मजरा सगरापुर की लक्ष्मी समूह की 15 महिलाएं है।
जो माइक्रान एवं मूंज से डलिया, मौनी समेत अन्य उत्पाद तैयार कर स्वयं के साथ परिवार को संवारने में जुटी हैं। मूंज की डलिया और मौनी 150 से लेकर सात सौ रुपये तक में बिक्री करती हैं। आय के साथ ही अपनी परंपरा को भी संजोए हैं। इसी तरह जिले में अन्य महिलाएं छोटे-छोटे कारोबार कर रहीं हैं।
प्रशिक्षण से बदली जिंदगी
आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को हुनर विकास, बैंक लिंकेज, बही-खाता और मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने समूह बनाकर छोटी पूंजी से काम शुरू किया। मोहकमपुर के मजरा सगरापुर की स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लक्ष्मी व सदस्य भानूमती बताती हैं कि पहले घर के खर्च के लिए पति पर निर्भर रहना पड़ता था।
अब हम खुद मूंज से डलिया, मौनी और सजावटी सामान बनाती हैं। जो 150 रुपये से लेकर 700 रुपये तक में बिक जाती है। इससे महीने में 15 से 20 हजार तक की आमदनी हो जाती है। बताया कि मूंज की डलिया, मोहनी, टोकरी, पूजा थाल और सजावटी आइटम का हाथों से निर्माण किया जाता है। डलिया व मौनी के निर्माण में समय और मेहन लगती है। पूंजी के नाम पर छेदन सामग्री व मूंज को कलर करने के लिए रंग का खर्च आता है।
मूंज खरीद लिया जाता है। वहीं कपड़े का बैग व झोला भी मोती लगाकर तैयार किया जाता है। इसकी बिक्री स्थानीय हाट-बाजार, सरकारी मेलों, प्रदर्शनी और सरकारी विभागों में आयोजित प्रदर्शनी में स्टाल लगा कर किया जाता है। इस आय से बच्चों की पढ़ाई व घर का खर्च चलाते हैं।
थारू समाज की महिलाएं बन रही मिसाल
मोकमपुर के मजरा सगरापुर की 15 महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि अगर सही मार्गदर्शन मिले तो थारू समाज की महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बनी है। पहले जहां इन्हें सिर्फ घर का काम करती थी, वहीं आज बैंक में खाता चलाती हैं, लेन-देन करती हैं और समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। इनकी सफलता से प्रेरित होकर जिले की अन्य ग्राम पंचायतों की महिलाएं भी छोटे-छोटे कारोबार अगरबत्ती, सिलाई, तो कोई अचार-मसाला बनाकर परिवार का पालन कर रही है।
एनआरएलएम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। थारू समाज की दोनों समूह जिले के लिए रोल माडल हैं। आगे इन्हें ई-कामर्स पर बिक्री और पैकेजिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ताकि इनके उत्पाद दूर-दूर तक पहुंच सकें। - सुशील कुमार अग्रहिर, उपायुक्त स्वत: रोजगार
