देवीपाटन मंदिर और सोहेलवा लेपर्ड सफारी से बढ़ेगा पर्यटन, बलरामपुर में खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
देवीपाटन मंदिर को भव्य बनाने के साथ बलरामपुर के सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में ईको-पर्यटन और थारू कैफे के बाद ...और पढ़ें

HighLights
देवीपाटन मंदिर का 42.50 करोड़ रुपये से होगा भव्य विकास।
सोहेलवा में ईको-पर्यटन स्थल, थारू कैफे के बाद लेपर्ड सफारी।
150 से अधिक तेंदुए और 400 पक्षी प्रजातियां सोहेलवा में।
अमित श्रीवास्तव, बलरामपुर। भागदौड़ भरी जिंदगी में समय के साथ पर्यटन भी बदल रहा है। सुकून के पल बिताने के लिए पर्यटन की योजना जब प्रकृति की गोद में हो, तो उसका राेमांच स्वत: ही बढ़ जाता है। यहां 51 शक्तिपीठों में से एक देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर में मां पाटेश्वरी का पावन धाम है। सीमा से सटा सोहेलवा जंगल है। यहां घूमने आने वालाें को देवी आराधना के साथ जंगल की वादियां देखने को मिलता है।
पर्यटन को बढ़ाने के लिए ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शक्तिपीठ देवीपाटन को और भव्य व दिव्य बनाने की कवायद शुरू की है। अयोध्या धाम में आने वाले धार्मिक पर्यटक भविष्य में देवीधाम की भी राह पकड़ें, इसके लिए सरकार ने 42 करोड़ 50 लाख रुपये दिए।
मंदिर के आसपास पर्यटन का विकास कराने के लिए 50 एकड़ जमीन खरीद की गई है। मंदिर को जाने वाले मार्ग पर हरैया तिराहा पर रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है। नवरात्र के नौ दिनों में लगभग 10 लाख दर्शनार्थी मां की आराधना के लिए देश-विदेश से आते हैं।
सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग की हरियाली और खूबसूरती को निहारने के लिए रामपुर रेंज में ईको पर्यटन योजना के तहत दारा नाला के पास जरवा में ईको-पर्यटन स्थल (पार्क) विकसित किया गया है। छह नवंबर 2024 को शुरू हुए ईको-पर्यटन स्थल में अब तक तीन लाख से अधिक पर्यटक आ चुके हैं। सीमा से सटा होने के कारण पर्यटकों को नेपाल के पहाड़ भी देखने को मिलते हैं।
वनराज का बढ़ रहा कुनबा, विकसित होगा लेपर्ड सफारी
प्रकृति की गोद में बसे सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग की पहचान अब बदलने जा रही है। शासन ने इसे ‘लेपर्ड सफारी’ के रूप में विकसित करने की योजना को हरी झंडी दे दी गई है। इस कदम से न सिर्फ वन्य जीव पर्यटन को पंख लगेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
बलरामपुर जल्द ही प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक बड़े इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभरेगा। कैमरा ट्रैप में गणना के अनुसार यहां 150 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसके अलावा भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय व 400 से अधिक पक्षी प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं।
घने जंगल और राप्ती के सहायक पहाड़ी नाले इसे सफारी के लिए आदर्श बनाते हैं। यहां बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। वर्ष 2022-23 में एक बाघ जंगल में वन कर्मियाें ने देखा था। इसके बाद ट्रैकिंग कैमरा लगाकर पुष्टि की गई, तो इनकी संख्या तीन मिली थी। वर्तमान में चार बाघ और दो शावक संग इनका परिवार सोहेलवा जंगल की आबोहवा में फल-फूल रहा है।
पक्षियाें की 400 से अधिक प्रजातियां
सोहेलवा में पक्षियों की करीब 400 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें कुछ ऐसी प्रजातियां भी हैं, जो काफी दुर्लभ हैं। इनमें प्रमुख रूप से पिनटेल, कामनक्रट, मध्य यूरो के गैंडेवाल, कामनटील, तिब्बत, लद्दाख के ब्रहमनी डक व दक्षिण साइबेरिया के नीलसर व लालसर पक्षियों की अठखेलियां देखकर पर्यटक रोमांचित होते हैं।
जब उत्तरी यूरोप में ठंड की अधिकता से पानी जम जाता है, तब मध्य एशिया के मेहमान पक्षी पिनटेल, कामनक्रट, मध्य यूरो के गैंडेवाल, कामनटील, तिब्बत व लद्दाख के ब्रहमनी डक व दक्षिण साइबेरिया के नीलसर व लालसर पक्षी भारत की ओर रुख करते हैं।
थारू कैफे में भारत-नेपाल की साझी विरासत का स्वाद
जरवा में ईको पर्यटन स्थल आने वाले पर्यटक अब थारू कैफे में चाय की चुस्की के साथ जनजाति के भोजन का स्वाद चख रहे हैं। ईको पर्यटन स्थल में दारा नाला के तट पर कैफे खुला है। यहां थारुओं के व्यंजन डिकरी (पीठा), घोंघी (दोनों चावल के आटा से बनता है), मुरब्बा, देशी आलू का कचालू, गुलगुला, खजुरिया मुख्य व्यंजन है। इसके साथ ही देदाल, चावल, चटपटी चटनी, ढिस्सा, स्योंढ़ा व देशी घी के छौंके दाल का आनंद मिलता है।
