बलरामपुर: जिले के नगर निकायों में अफसर-बिल्डर गठजोड़ का खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ रहा है। बेसमेंट में दुकानें बेचकर बिल्डर मालामाल हो गए, लेकिन अफसर उदासीन बने रहे। सड़क किनारे अवैध पार्किंग का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे शहरवासियों को को जाम के झाम से निजात नहीं मिल पा रही है।

नगर पालिका प्रशासन ने एनओसी देने के बाद से चुप्पी साध ली है। वहीं विनियमित क्षेत्र की नोटिस जारी करने की बात भी हवाई साबित हो रही है।

नगर क्षेत्र में बहुमंजिला भवन तैयार कर बेचने में बिल्डरों की मनमानी पर नकेल नहीं कसी गई। नतीजा, बेसमेंट में पार्किंग के बजाय दुकानें फल-फूल रहीं हैं। मानचित्र में पार्किंग दर्शाकर साठगांठ से पास करा लिया गया। भवन तैयार होकर ऊंची कीमतों पर दुकानें भी उठा दी गई, लेकिन जिम्मेदारों ने जांच करना मुनासिब नहीं समझा।

विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसे भवन स्वामियों के खिलाफ नोटिस जारी की गई है। वहीं, सड़क किनारे अवैध पार्किंग न हटना प्रशासन की संजीदगी की पोल खोल रहा है। उधर नगर पालिका प्रशासन अपने चहेतों पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। फुटपाथों पर अतिक्रमण सुगम यातायात में रोड़ा बना हुआ है। इन सबके बीच नपाप की कार्रवाई महज कागजों तक सीमित है।

ईओ नगर पालिका राकेश कुमार जायसवाल का कहना है कि उच्चाधिकारियों को अवैध पार्किंग करने वालों की सूची देकर अभियान चलाने की अनुमति मांगी गई है।

यह हैं जिम्मेदार:

गोंडा, तुलसीपुर, बहराइच व उतरौला मार्ग पर अवैध पार्किंग के लिए ईओ राकेश जायसवाल, अवर अभियंता अनिल श्रीवास्तव, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर मानवेंद्र पाठक व प्रभारी यातायात वीरेंद्र यादव जिम्मेदार हैं।

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