बलरामपुर: कायाकल्प अवार्ड से वंचित महिला अस्पताल व संयुक्त अस्पताल की अव्यवस्था ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद उड़ा दी है। कायाकल्प अवार्ड न पाने के कारण मुख्य चिकित्साधिकारी दो दिनों से लगातार अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं। मंगलवार को महिला अस्पताल की हालत देखा चिता जाहिर की।

महिला अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त मात्रा में चादर होने के बावजूद 30 में से 25 बेड पर एक भी चादर नहीं मिली। यही नहीं मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. विनीता राय के कक्ष में गंदगी मिली। यह हालत तब है जब यहां के क्वालिटी मैनेजर डा. वसीम खान की तैनाती है। इनके वेतन पर हर साल सात से आठ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में सफाई दिख रही है और न ही किसी तरह का प्रबंधन।

यही नहीं, सभी चिकित्सक रोज न आकर बारी-बारी से आते हैं। अस्पताल के बाहर कुत्ते बैठे रहते हैं। गंदगी का अंबार लगा रहता है। चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी वसूली के लिए मरीजों को भगा देते हैं, लेकिन सीएमएस को यह सब देखने की फुर्सत नहीं मिलती है।

कुछ ऐसा ही हाल संयुक्त अस्पताल का भी है, जहां की भ्रष्ट कार्यप्रणाली मरीजों व तीमारदारों का दर्द बढ़ा रही है। मरीजों से अभद्रता वसूली, इलाज में लापरवाही के चलते दिनोंदिन मरीजों की संख्या घट रही है। डाक्टर सुधरने को तैयार हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी।

सीएमओ ने बताया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय व महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की लापरवाही व भ्रष्ट कार्यप्रणाली ने पूरी व्यवस्था को चौपट कर रखा है। दोनों को सुधार लाने की हिदायत दी गई है।

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