बलरामपुर: एक तरफ प्रदेश सरकार के साढ़े चार साल पूर्ण होने पर भाजपा के मंत्री व विधायक उपलब्धियां गिना रहे हैं। इसी की आड़ में बेसिक शिक्षा विभाग भी कागजों में करोड़ों रुपये खर्च कर स्कूलों की सुंदर तस्वीर पेश कर रहा है।

जिले के 1247 प्राथमिक, 333 उच्च प्राथमिक व 317 कंपोजिट स्कूलों को आपरेशन कायाकल्प से संतृप्त करने का दावा किया जा रहा है। जबकि हकीकत तो यह है कि 300 से अधिक स्कूलों में अब तक कायाकल्प की छांव नहीं पहुंची है। विद्यालय की दीवारें व बदहाल शौचालय कायाकल्प की दास्तां बयां कर रहे हैं। वहीं, कंपोजिट स्कूल ग्रांट से आठ करोड़ 62 हजार 500 रुपये होने के बाद भी स्कूलों की काया जर्जर ही नजर आ रही है।

एसएमसी से बनती थी कार्य योजना:

कंपोजिट स्कूल ग्रांट से मिली धनराशि का संचालन विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) अध्यक्ष व सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाना था। बजट खर्च करने के लिए एसएमसी को पहले कार्य योजना बनानी थी।

साथ ही अभियान चलाकर विद्यालय के ब्लैक बोर्ड एवं हरी पट्टी की मरम्मत व रंगाई-पोताई, वाल पेंटिंग, अग्निशमन यंत्र में फिलिग, आइएसआइ मार्क के विद्युत उपकरण की खरीद, दिव्यांग छात्रों के लिए टीएलएम व एंबोस्ड ग्लोब मानचित्र की खरीद का निर्देश था। उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रयोगशालाओं व कंप्यूटर शिक्षा पर भी बजट खर्च किया जाना था।

पांच श्रेणी में हुआ धन आवंटन:

वर्ष 2020-21 में कंपोजिट स्कूल ग्रांट पांच श्रेणियों में आवंटित हुआ है। इसमें एक से 14 तक छात्रों के नामांकन वाले 23 स्कूलों में 12,500 रुपये के हिसाब से 2,87,500 रुपये भेजे गए हैं। 15 से 100 छात्र संख्या वाले 1233 स्कूलों में 25 हजार की दर से तीन करोड़ आठ लाख 25 हजार व 101 से 250 छात्रों वाले 933 स्कूलों में 50 हजार के हिसाब से चार करोड़ 68 लाख 50 हजार रुपये आवंटित हुए हैं। 251 से एक हजार तक विद्यार्थियों वाले 28 स्कूलों में 75 हजार रुपये की दर से 41 लाख रुपये भेजे गए थे।

देना होगा उपभोग प्रमाण पत्र:

बीएसए डा. रामचंद्र का कहना है कि प्रधानाध्यापकों को कंपोजिट ग्रांट के व्यय का उपभोग प्रमाणपत्र देना होगा। सभी बीईओ को अपने क्षेत्र में रैंडम आधार पर 20 प्रतिशत स्कूलों में सामग्री क्रय की जांच करने का निर्देश दिया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Jagran