बलरामपुर : संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में तीन दिन से धरना दे रहे एंबुलेंस कर्मियों के सब्र का बांध टूट रहा है। रविवार को जिले भर के एंबुलेंस कर्मियों ने धरने में भाग लेकर आरपार लड़ाई का ऐलान कर दिया। सोमवार से सभी अस्पतालों में एंबुलेंसों का चक्का जाम करने का निर्णय लिया है।

जिला संयुक्त अस्पताल में एंबुलेंस कर्मियों ने कहा कि कोरोना काल में जिस तरह जान हथेली पर रखकर मरीजों की सेवा की है, वह सराहनीय है। जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि रविवार की रात 12 बजे से एंबुलेंस के चक्के थम जाएंगे जिसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की होगी। संगठन मंत्री सूरज पांडेय ने कहा कि एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सेवा का संचालन बदलकर कर्मियों के साथ अन्याय किया है। पहले यह जीवीके ईएमआरआइ चला रही थी, लेकिन अब जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड को दे दिया गया है। नई कंपनी अब नई भर्ती कर रही है और हर अभ्यर्थी से 20 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट मांग रही है।

राम शंकर सिंह ने कहाकि ठेका प्रथा को बंद कर कर्मियों का समायोजन किया जाए। समान कार्य के लिए समान वेतन देने की बात कही। राजकुमार जायसवाल ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारियों की कोरोना काल में मौत हुई है। उनके परिवारजन को 50 लाख रुपये बीमा राशि दिलाई जाए। प्रिस सिंह, बुधराम वर्मा, रमेश मिश्र, अनुज कुमार, अभय वर्मा, राजेंद्र तिवारी, अमरनाथ यादव, अमरदीप उपाध्याय, राजेश पांडेय,विजय पाठक, राम सावरे पटेल, राम कुमार त्रिपाठी समेत अन्य एंबुलेंस कर्मी शामिल रहे। स्वास्थ्य सेवाएं हो जाएंगी बदहाल : जिले की चिकित्सा सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। जिला मुख्यालय के अस्पतालों की बात करें तो आसानी से इलाज मिलना कहीं भी संभव नहीं है। कारण जिला संयुक्त अस्पताल चिकित्सकों व जिला मेमोरियल अस्पताल कर्मियों की किल्लत से जूझ रहा है। यही हाल महिला अस्पताल का भी है जहां मरीज दिन भर तड़पते रहते हैं, लेकिन कोई हाथ तक लगाना मुनासिब नहीं समझता। अब एंबुलेंस कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद चिकित्सा सेवाएं और बदहाल हो जाएंगी।

Edited By: Jagran