त्रिपुरारी शंकर तिवारी, बलरामपुर : भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ आजकल दिल्ली में है •ोर-ए-बहस ये मुदद्आ। प्रसिद्ध शायर दुष्यंत कुमार की यह लाइन तीन जिलों के 3262 किसानों पर फिट बैठ रही है। जो अपनी ही पूंजी पाने के लिए दर -दर भटक रहे हैं, लेकिन अधिकारी कार्रवाई के नाम पर केवल गोंडा,बलरामपुर, बहराइच के बीच पत्रों के आदान प्रदान करने तक सिमटे हुए हैं।

सहकारिता से किसानों को जोड़ने के लिए 1992 में यहां किसान सेवा साधन सहकारी समिति लिमिटेड विशुनीपुर में मिनी बैंक शुरू हुआ था। वर्ष 2002 में लेनदेन के बाद बंद हो गया। गोंडा, बलरामपुर व बहराइच जिलों के 3262 खाताधारकों का जमा धन अधर में लटक गया। खाताधारकों का एक करोड़ 12 लाख रुपये जमा थे। खाताधारक आस लगाए थे कि देर सबेर उनकी पूंजी उन्हें मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अप्रैल 2015 में परिसमापक गोंडा ने एक करोड़ 12 लाख के सापेक्ष 83 लाख 15 हजार 45 रुपये ही जमा होना स्वीकार किया था। उसका भुगतान भी नहीं हो सका। तब से पत्रों का आदान प्रदान ही चल रहा है। खाताधारकों का छलका दर्द : खैराही निवासी राधिका प्रसाद का 22763, भगवतीगंज की प्रमिला देवी का 40000, हरीराम का 54000, शंकरपुर के मंगल का 13419 रुपये, श्यामबिहारी का 39870, दुखहरण का 16532, बसंतपुर के मुक्ता का 1,43,693, गौरीशंकर 7096, बच्चूलाल का 8849, छेदी का 12340, संतराम का 9735 रुपया फंसा हुआ है। 3262 खाताधारक अपना बकाया एक करोड़ आठ लाख 23 हजार 850 रुपये पाने के लिए भटक रहे हैं।

चल रही लिखा पढ़ी : सहायक विकास अधिकारी सहकारिता राजाबाबू ने बताया कि 21 अक्टूबर 2019 व 30 अक्टूबर को परिसमापक गोंडा को पत्र भेजा था। सहायक आयुक्त एवं सहायक उपनिबंधक सहकारिता अशोक कुमार गुप्त ने बताया कि मामला काफी पुराना है। धन वापसी के लिए लिखा-पढ़ी चल रही है। किसान दिवस पर यह मामला उच्चाधिकारियों के सामने उठता है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप