जागरण संवाददाता, नगरा ( बलिया) : दो वर्ष पूर्व जब नगरा को नगर पंचायत का तगमा मिला तो यहां के निवासियों को लगा कि बंद पड़ी पानी टंकी चालू हो जाएगी, लेकिन स्थिति जस की तस रही। नगरा वासियों को स्वच्छ पेयजल नसीब नहीं हैं। नगर पंचायत द्वारा लाखों रुपये खर्च कर पानी टंकी की मरम्मत कराई गई है, इसके बावजूद स्थिति बदहाल है। टंकी चालू नहीं हो सकी। टंकी का लोकार्पण डेढ़ दशक पूर्व वर्ष 2006 में हुआ था। जब भी टंकी का नलकूप चालू किया जाता है जगह-जगह पाइप में लीकेज होने से पानी बाहर फैलने लगता है।

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- एक करोड की लागत से बनी यहां की पानी टंकी से डेढ दशक के भीतर कभी जलापूर्ति ही नहीं हुई। यहां के लोग स्वच्छ जल के लिए तरस गए हैं। नगर पंचायत के अधिकारियों को चाहिए कि वह टंकी को चालू कराएं। --- राजबहादुर सिंह अंशू - नगरा की टंकी शोपीस बनी हुई है। नगर पंचायत के लोग दूषित पानी पीने को बाध्य हैं। इसे चालू कराने को लेकर कोई भी संवेदनशील नहीं हैं। जनहित में टंकी को चालू कराना जरूरी है।-- जयप्रकाश जायसवाल - पानी टंकी जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते डेढ दशक में भी चालू नही हो सकी। नगर पंचायत भी ध्यान नही दे रही है। लोगों को स्वच्छ पेयजल नसीब नही हो रहा है। -धनंजय पांडेय -नगर पंचायत बनने के बाद लोंगों में विश्वास जगा था कि पानी टंकी से जलापूर्ति अब शुरु हो जाएगी कितु नतीजा ढाक के तीन पात साबित हुआ। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से टंकी बंद पडी है। -रामदरश यादव क्रांति

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पानी टंकी को चालू कराने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग की धनराशि से व्यवस्था कर ली गई है। स्टीमेट बनाकर जिलाधिकारी के पास स्वीकृति के लिए भेंज दिया गया है। अधिकतम एक माह के भीतर टंकी को चालू करा दिया जाएगा।

रामबदन यादव, ईओ, नगर पंचायत नगरा

Edited By: Jagran