जागरण संवाददाता, बलिया : भीषण गर्मी से बेहाल जनजीवन को संतृप्त करने में पानी की अहम भूमिका होती है। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्तर नीचे खिसकने से पेयजल संकट गहरा गया है। वहीं जल संचयन के उद्देश्य से निर्मित दर्जनों पोखरे व तालाब दुर्दशा का शिकार होकर अपना अस्तित्व खोने के कगार पर हैं। कई जगह तो ताल तलैया सूखे पड़े हैं। जल संचयन के संसाधन लगभग ध्वस्त हो चुके हैं और भीषण गर्मी में पानी के लाले पड़ गए हैं।

पोखरे व तालाब दुर्दशा के शिकार

बैरिया : जल संरक्षण व संचयन के उद्देश्य से विकास खंड मुरलीछपरा व बैरिया में पांच वर्ष पूर्व करोड़ों की लागत से बनवाए गए दर्जनों पोखरे व तालाब दुर्दशा के शिकार हैं। लगभग सभी पोखरे व तालाब पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। कुछ में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं तो कुछ में बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये व्यर्थ हुआ। वहीं सरकार की मंशा के अनुकूल जल संरक्षण व संचयन का कार्य भी कहीं पर नहीं हो पा रहा है। इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं, ग्राम प्रधानों को इन पोखरों को दोबारा ठीक कराना चाहिए या क्षेत्र पंचायत से इसका रख-रखाव व मरम्मत कार्य संपादित होना चाहिए। इस पर अधिकारी व ग्राम प्रधान मौन साध ले रहे हैं। विकास खंड मुरलीछपरा व बैरिया में जल संरक्षण व जल संचयन के लिए ज्यादातर पंचायतों में पोखरों का निर्माण कराया गया था कितु उसके आज तक न मरम्मत कराया गया और न पानी की उपलब्धता के लिए कोई व्यवस्था की गई। इस कारण पोखरे अपना अस्तित्व खोने के कगार पर खड़े हैं। कुछ पोखरों में बोरिग भी कराया गया था कितु उसे न तो मरम्मत किया गया और न ही पोखरों में पानी रखने की व्यवस्था की गई।

इंसान के साथ पशु-पक्षी भी बेहाल

इंदरपुर : विकास खंड चिलकहर का ग्रामीण अंचल भीषण गर्मी से परेशान है। जबकि तालाब व पोखरे सूखे पड़े हैं वहीं हैंडपंपों का जलस्तर नीचे खिसक रहा है कितु जिम्मेदारों को इसकी फिक्र नहीं है। पशु-पक्षियों का हाल बेहाल है तो खेतों के तरफ रहने वाले छोटे-छोटे जानवर गांवों का रुख कर रहे हैं। डुमरी, संवरा, गोपालपुर, बछईपुर, कुरेजी, रघुनाथपुर, चितामनिपुर कोढ़ऊपुर, हजौली समेत चार दर्जन ग्रामसभाओं में हैंडपंपों से पानी का स्तर नीचे खिसक गया है। गांवों से बाहर बने अधिकतर पोखरे सूखे पड़े हैं। इक्के-दुक्के पोखरों में पानी है भी तो वह सिर्फ दिखावे भर रह गया है। कुछ गांवों में छोटे हैंडपंप जवाब दे रहे हैं तो इंडिया मार्का मशीनों से पानी मशक्कत के बाद निकल रहा है।

Posted By: Jagran