बलिया में सरसों की जगह सत्यानाशी के बीज से निकले तेल ने ले ली एक ही परिवार के तीन लोगों की जान
बलिया के पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत का कारण सत्यानाशी के बीज से निकले ...और पढ़ें

बलिया में सत्यानाशी तेल ने ली तीन जानें सरसों में मिलावट से फैला जहर।
HighLights
बलिया में सत्यानाशी तेल से एक परिवार के तीन सदस्य मरे।
सरसों तेल में गलती से सत्यानाशी का जहरीला तेल मिल गया था।
एम्स गोरखपुर ने मौतों का कारण एपिडेमिक ड्राप्सी बताया।
जागरण संवाददाता, बेल्थरारोड (बलिया)। बेल्थरारोड तहसील के पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत मामले में कारण सामने आने के बाद लोग हैरान हैं। प्रारंभिक जांच में सत्यानाशी (आर्जीमोन मैक्सिकाना) के बीज से निकले तेल के सेवन को मौतों की वजह बताया गया है। एम्स गोरखपुर में हुई जांच में एपिडेमिक ड्राप्सी की पुष्टि होने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों का उपचार बेहतर हो रहा है।
भतीजे सूरज ने बताया कि शिवचंद राजभर कर्नाटक के बेल्लारी में श्रमिक का काम करते हैं। वह इसी वर्ष मई में करीब आठ किलो सत्यानाशी के बीज बेल्लारी से लेकर गांव आए थे। वह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से घुटनों के दर्द से परेशान थे। बेल्लारी में ही लोगों की सलाह पर उन्होंने दर्द से राहत के लिए सत्यानाशी के बीज से तेल निकालकर मालिश करने का निर्णय लिया था।
मई के अंतिम सप्ताह में शिवचंद ने सत्यानाशी के बीज से तेल निकलवाया और उसका इस्तेमाल करने लगे। इसी दौरान एक दिन सत्यानाशी का तेल निकालने के बाद उन्होंने घर में रखे सरसों के तेल को भी निकाल लिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों तेल आपस में मिल गए और परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
इसके बाद जून के अंतिम सप्ताह में शिवचंद अपने कार्यस्थल लौट गए। इस दौरान परिवार के तीन सदस्य उनकी मां 80 वर्षीय जोनिया देवी, पत्नी 45 वर्षीय आशा देवी और 20 वर्षीय बेटी प्रीति, बेटा 25 वर्षीय मनन अनजाने में सत्यानाशी के तेल का सेवन करते रहे। कुछ समय बाद तीनों की तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी।
तबीयत अधिक खराब होने पर स्वजन ने शिवचंद को इसकी सूचना दी। वह 18 जुलाई को दोबारा बेल्लारी से घर लौटे, लेकिन तब तक परिवार के सदस्यों की हालत गंभीर हो चुकी थी। उपचार के बावजूद 29 अगस्त को सबसे पहले उनकी पत्नी आशा देवी की मृत्यु हो गई। इसके बाद जोनिया देवी और प्रीति की भी मौत हो गई। भतीजे सूरज के अनुसार, घर लौटने के बाद शिवचंद ने भी उसी तेल से बनी सब्जियां खाई जिससे वह भी बीमार पड़ गए। हालांकि अब उनकी तबीयत में अब काफी सुधार है।
यह होती है एपिडेमिक ड्राप्सी
सीएमओ डा. अभय नारायण राय के मुताबिक सत्यानाशी के बीजों में सेंगुइनेरिन नाम का एक अत्यंत जहरीला अल्कलाइड पाया जाता है। इसके बीज दिखने में काफी हद तक काली सरसों जैसे ही होते हैं। यदि सरसों के तेल में मिल जा तो यह जहरीला हो जाता है। इसके सेवन से पैरों और टखनों में भारी सूजन, पेट और पाचन की समस्या, उल्टी, दस्त, मतली और पेट में तेज दर्द, दिल की धड़कन तेज और सांस फूलना और त्वचा का लाल होना, खुजली व उस पर चकत्ते पड़ना, आंखों की समस्या समेत अन्य बीमारियां होती हैं। गांव में निरीक्षण व शिवचंद के घर में जांच के बाद गत 11 सितंबर को एम्स गोरखपुर में तेल का सैंपल भेजा गया था जिसमें इसकी पुष्टि हुई।
ऐसे करें बचाव
- खुला तेल खरीदने से बचें, यदि किचन में तेल रखते हैं तो वहां पर अन्य कोई दूसरा तरल पदार्थ न रखें।
- यदि आप अपने खेत की सरसों का तेल कोल्हू में पेरवाने जा रहे हैं, तो सरसों के दानों को अच्छी तरह से छान लें।
- सत्यानाशी के बीज आकार में थोड़े अनियमित, खुरदरे और पूरी तरह गोल नहीं होते, जबकि सरसों गोल और चिकनी होती है।
- यदि घर में सरसों तेल का उपयोग करने के बाद किसी भी सदस्य के पैरों में अचानक सूजन या पेट खराब होने जैसी समस्या आए, तो तुरंत उस तेल का उपयोग बंद करें और डाक्टर से संपर्क करें।
- किचन में तेल रखने के लिए कांच या पारदर्शी प्लास्टिक के जार का इस्तेमाल करें। इससे आपको तेल का रंग, उसमें कोई तलछट या तैरती हुई मिलावट साफ दिखाई देगी।
- जब भी तेल के डिब्बे से तेल कड़ाही में निकालें, तो ध्यान दें कि डिब्बे के नीचे कोई काला, गाढ़ा तो नहीं जमा है। यदि है तो तेल इस्तेमाल न करें।
