जागरण संवाददाता, बलिया: जिले में इस साल एक लाख 79 हजार 999 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की खेती की जाएगी। इस वर्ष का लक्ष्य पिछले साल की तुलना में दस हजार 359 हेक्टेयर यानी 6.1 प्रतिशत अधिक है। अकेले गेहूं की फसल के लिए एक लाख 37 हजार 591 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है जो पूर्व की तुलना में 755 हेक्टेयर अधिक है।

इसके अलावा जौ, मक्का, तोरिया, सरसो, चना, मटर व मसूर के लिए भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक लक्ष्य तय किया गया है। मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जौ की फसल के लिए 4066 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती करने का लक्ष्य रखा गया है जो बीते वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा मक्का, चना व मसूर की खेती क्रमश: 4784, 3268 तथा 23890 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित है जो पहले के मुकाबले 49.87, 2.57 तथा 28.28 फीसद अधिक है। वहीं तोरिया, सरसो व मटर की खेती क्रमश: 1268, 1169 व 3963 हेक्टेयर में की जाएगी। बात यदि सकल उत्पादन की करें तो पिछले साल की तुलना में सात फीसद की वृद्धि करते हुए छह लाख 25 हजार 601 एमटी उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें गेहूं का उत्पादन लक्ष्य 5 लाखा 41 हजार 2 एमटी रखा गया है। वहीं मक्का का उत्पादन 13682 एमटी करने का लक्ष्य है।

इनेसट

उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध

किसानों की मांग व बाजार को देखते हुए कृषि विभाग इस बार उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध करा रहा है। विभाग की यह कोशिश है कि अधिक से अधिक किसानों को प्रमाणित व आधारीय बीज उपलब्ध कराया जाए ताकि बेहतर उत्पादन प्राप्त हो। इसके लिए चना की दो वेराइटी जीएनजी-1998 व जेजी-14, मसूर की तीन केएल-320, आईपीएल-316 व पीएल-08 उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा 2967 व 3086 मार्का गेहूं, एनडीबी 943 जौ व पीएम-30 नामक सरसों का बीज प्राप्त किया जा सकता है।

वर्जन

-जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार पटेल ने बताया कि उन्नत किस्म के इन बीजों के प्रयोग से न सिर्फ बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है बल्कि फसलों के रोगग्रस्त होने की संभावना भी कम होती है। इसके अलावा मिट्टी में कैल्शियम व सल्फर की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रति बीघा एक बोरी जिप्सम का प्रयोग करना चाहिए, जो विभागीय केन्द्रों से 51 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से प्राप्त किया जा सकता है।

-विकेश कुमार पटेल, जिला कृषि अधिकारी

Posted By: Jagran

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