जागरण संवाददाता, मालीपुर (बलिया) : कहते हैं इंसान के जीवन में जब गर्दिश की घड़ी आती है तो अपना साया भी साथ छोड़ देता है। सगे संबंधी भी पराये हो जाते हैं। सब मुंह मोड़ लेते हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा समाज के निचले पायदान पर खड़े पात्र व्यक्तियों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी कतिपय भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों के चलते मिल नहीं पाता है। इसका एक उदाहरण बिल्थरारोड तहसील अंतर्गत नगरा ब्लाक के करनी गांव में देखने को मिल रहा है, जहां 36 वर्षीय बड़े लाल पुत्र स्व. दीनानाथ प्रसाद जानलेवा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आकर जीवन-मौत के संघर्ष से जूझ रहा है। इलाज के लिए उसके पास एक ढेला भी नहीं है। पति-पत्नी एवं तीन संतानों की क्षुधा शांति के लिये दो जून की रोटी का जुगाड़ करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। बच्चों की शिक्षा दीक्षा भी अधर में लटक गई है। पूरी तरह से भूमिहीन युवक के जीवन यापन के लिए किसी तरह की कृषि योग्य सरकारी पट्टा एवं आवासीय पट्टा भी नहीं मिला है। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना शौचालय योजना से भी वंचित कर दिया गया है। अभी तक उसका राशन कार्ड भी नहीं बना है। गर्मी, बरसात, जाड़े के थपेड़े सहन करने के लिए उसके पास एक अदद घास फूस से निर्मित प्लास्टिक कवर से ढंकी टूटी फूटी झोपड़ी है। पड़ोसी पहले खाने पीने के लिए मदद कर दिया करते थे। अब वह भी हाथ बटोर लिए हैं। स्थानीय ग्राम पंचायत, क्षेत्रपंचायत, जिला पंचायत, राजनीतिक दल के साथ साथ क्षेत्रीय सांसद, विधायक की ओर से भी उसे किसी तरह की मदद की पहल नहीं हो रही है। हां, अलबत्ता स्थानीय कोटेदार की दरियादिली से विगत दो बार राशन मिल चुका है।

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