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जागरण संवाददाता, नगरा (बलिया) : सर्वोच्च न्यायालय के पटाखा जलाने के समय का निर्धारण किए जाने से लोगों ने राहत की सांस ली है। न्यायालय के इस फैसले को आम से खास तक सभी ने सराहा है। लोगों का कहना है कि कोर्ट द्वारा समय सीमा का निर्धारण किए जाने से पटाखों के शोर से निजात मिलेगी। वहीं ध्वनि व वायु प्रदूषण में भी कमी होगी। हालांकि न्यायालय के इस आदेश का किस हद तक अनुपालन होता है यह तो समय ही बताएगा। देखना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रति प्रशासन कितना संवेदनशील होता है।

पटाखा बजाने पर समय की पाबंदी जनहित में

नियत समय के अंदर पटाखा छोड़ने के इस आदेश पर गंभीरता पूर्वक अमल करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश तो दे दिए गए हैं। इस पर प्रशासन का लहजा सख्त होता दिख रहा है। पटाखा जलाने से जहां तेजी से प्रदूषण बढ़ता है वहीं विभिन्न रोगों से ग्रस्त लोगों की परेशानियां बढ़ जाती है। सबसे अधिक हृदय रोगी प्रभावित होते हैं। इस दृष्टि से भी पटाखा बजाने पर रोक लगाना उचित है। दीपावली के दिन तो पटाखा जलाते वक्त बच्चे चोटिल भी हो जाते हैं। आम लोगों का कहना है कि ऐसे पटाखों की बिक्री होनी चाहिए जो कम नुकसानदेह हो। --पटाखा जलाने से जहां ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। वहीं विभिन्न मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी तो पटाखे से निकला धुआं रोगियों की जान पर बन आता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लोगों को काफी राहत मिलेगी।

-रानू विमल

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखा जलाने के लिए समय का निर्धारण किया जाना अपने आप में एक ऐतिहासिक निर्णय है। इस निर्णय से शोर शराबे में कमी आएगी। वहीं पटाखा खरीदने के नाम पर हो रही पैसे के बर्बादी पर भी अंकुश लग सकेगा। कोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

-परसन राम

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पटाखा जलाने से वायुमंडल दूषित हो जाता है। पटाखों से निकला गैस तरह तरह की बीमारियां पैदा करता है। कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइड लाइन का अक्षरश: पालन होना चाहिए। इसके लिए प्रशासन को भी गंभीर होना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार एक निर्धारित समय के भीतर ही पटाखा जलेगा।

रमाशंकर

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला वास्तव में ऐतिहासिक है। इस निर्णय से बेवजह धन की बर्बादी पर रोक लग सकेगी। शोर शराबों पर भी अंकुश लगेगा। हम सभी को चाहिए कि अपने बच्चों को पटाखा न जलाने की नसीहत दें। साथ ही इससे होने वाली हानियों से उन्हें अवगत कराएं।

ज्ञानचंद

Posted By: Jagran

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