बलिया में सरयू की कटान का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, अधिकारियों से मांगा जवाब
बलिया में सरयू नदी की कटान का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है, जहां से जिले के अधिकारियों से ...और पढ़ें

बलिया में सरयू कटान पर मुख्यमंत्री कार्यालय का संज्ञान, अधिकारियों से मांगा जवाब।
HighLights
सरयू कटान का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिले के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी।
दैनिक जागरण की खबरों के बाद लिया गया संज्ञान।
जागरण संवाददाता, बलिया। सरयू नदी की कटान से प्रभावित गोपाल नगर टाड़ी गांव के ग्रामीणों की परेशानी का मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। कटान की गंभीर स्थिति और ग्रामीणों की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिले के अधिकारियों से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है। इससे प्रभावित लोगों को समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है।
दैनिक जागरण ने सरयू की कटान और इससे प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण करने के बाद स्थिति सामान्य होने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन इसके बावजूद नदी की कटान जारी रही और हाल में दो और मकान सरयू में समा गए।
इस मामले में दैनिक जागरण ने 13 सितंबर के अंक में पेज आठ पर ‘कटानरोधी कार्य से राहत नहीं, गोपाल नगर टाड़ी में और गिरे दो मकान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने उसकी कटिंग जिले के अधिकारियों को भेजकर जवाब मांगा है। ग्रामीणों के अनुसार, गोपाल नगर टाड़ी गांव में अब तक करीब 48 मकान सरयू नदी की कटान की भेंट चढ़ चुके हैं।
गांव के रामनरेश यादव, कमलेश यादव, रामपलट यादव और संजय यादव के मकान भी कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं। कई परिवार के लोग बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए पहले ही अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों अथवा रिश्तेदारों के यहां शरण ले चुके हैं।
500 करोड़ खर्च पर कटान जारी, पिछले वर्ष 196 मकान नदी में हुए थे समाहित
गंगा और सरयू नदी के बाढ़ व कटान से हर वर्ष जिले के किसानों को भारी क्षति होती है। सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड की ओर से प्रतिवर्ष औसतन 100 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य कराए जाते हैं, लेकिन बाढ़ और कटान की समस्या पर स्थायी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। विगत पांच वर्षों में 500 करोड़ खर्च हो चुके हैं पर हालत में सुधार नहीं है।
पिछले वर्ष सदर, बांसडीह और बैरिया तहसील क्षेत्र के कुल 7,415 किसान कटान से प्रभावित हुए और उनकी कृषि भूमि नदी में समा गई, इसके बावजूद मुआवजा व्यवस्था किसानों की पीड़ा कम करने में नाकाफी साबित हो रही है। बीते वर्ष भूमि क्षति के एवज में सरकार ने कुल तीन करोड़ 42 लाख 96 हजार रुपये का मुआवजा वितरित किया है।
पिछले वर्ष सदर, बैरिया और बांसडीह तहसील में 196 मकान भी नदी में समा गए थे। इनमें 154 पक्के, नौ कच्चे मकान और 33 झोपड़ियां शामिल थीं। इसके अलावा इस वर्ष विगत दो माह में 48 मकान नदी में विलीन हो गए। प्रभावित परिवारों को पक्के मकान के लिए 1.20 लाख रुपये तथा कच्चे मकान या झोपड़ी के लिए आठ हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा जिले में बाढ़ से करीब 123 परिषदीय विद्यालय भी प्रभावित होते हैं।
सरयू की लहरों ने लील लिया प्राथमिक विद्यालय
गोपालनगर टांड़ी गांव में ही इसी वर्ष 27 जुलाई को प्राथमिक विद्यालय नदी में समाहित हो गया था। यहां अध्ययनरत 180 बच्चों को गांव के दूसरे विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
महराजपुर व भोजपुरवा के लोग अपना मकान तक तोड़ चुके
सरयू नदी की आक्रामक धारा और तेज कटान से महराजपुर व भोजपुरवा गांव पर भी संकट मंडरा रहा है। भोजपुरवा में करीब 125 लोगों ने एक माह पहले ही अपने मकान खाली कर दिए। 50 से ज्यादा लोगों ने अपने मकान तक अपने हाथों से उजाड़ दिए। अभी हाल में भोजपुरवा में पानी पहुंचने के बाद एनडीआरएफ ने करीब 100 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया था।
