बलिया में नम आंखों से विदा हुए रामगोविंद चौधरी, पंचतत्व में विलीन, आंखों से छलके आंसू
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी बलिया में पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पैतृक गांव ...और पढ़ें
HighLights
पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी बलिया में पंचतत्व में विलीन हुए।
पैतृक गांव गोसाईंपुर में अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब।
विभिन्न दलों के नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, कई हुए भावुक।
जागरण संवाददाता, नवानगर (बलिया)। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता एवं पूर्व मंत्री रहे रामगोविंद चौधरी रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। सरयू तट पर इकलौते पुत्र रंजीत चौधरी ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पूर्व उनके पैतृक निवास पर गार्ड आफ आनर देकर सलामी दी गई। अंतिम विदाई देने के लिए उनके पैतृक गांव गोसाईंपुर जनसैलाब में तब्दील हो गया था।
अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे। गांव की गलियों से लेकर मुख्य मार्ग तक हर ओर लोगों की भीड़ दिखाई दी। किसी की आंखों में आंसू थे तो किसी के चेहरे पर वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों को खोने का दर्द साफ झलक रहा था।
रामगोविंद चौधरी ने गत 25 सितंबर, शुक्रवार को लखनऊ स्थित पीजीआइ में अंतिम सांस ली थी। उनके निधन की खबर फैलते ही पूर्वांचल के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव गोसाईंपुर लाया गया था। रविवार की सुबह होते-होते अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ लगातार बढ़ती गई और कुछ ही घंटों में यह जनसैलाब में बदल गई।
जाम में थमे पहिए, पैदल ही बढ़े कदम
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के कारण गोसाईंपुर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई स्थानों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। सड़क पर वाहनों के पहिए थम गए, लेकिन लोगों के कदम नहीं रुके। बड़ी संख्या में लोग अपनी गाड़ियां रास्ते में छोड़कर पैदल ही गांव की ओर बढ़ते रहे। गोसाईंपुर का माहौल ऐसा था कि गांव की ओर आने वाला हर रास्ता लोगों से भरा नजर आ रहा था।
दूर-दराज से पहुंचे लोग किसी भी तरह अपने नेता के अंतिम दर्शन करना चाहते थे। गांव की गलियों और आसपास के रास्तों पर लोगों की भीड़ लगातार बनी रही। रामगोविंद चौधरी के अंतिम दर्शन के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का पहुंचना भी चर्चा में रहा। पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने राजनीतिक मतभेदों को पीछे रखते हुए उनके पैतृक आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम विदाई के दौरान दलगत सीमाओं से परे आत्मीय माहौल नजर आया। अंतिम दर्शन के बाद स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी की अंतिम यात्रा निकली तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और अपने नेता को अंतिम विदाई देने के लिए सरयू नदी के तट स्थित श्मशान घाट तक पहुंचे।
अंतिम दर्शन के दौरान भावुक हुए नेता, छलके आंसू
रविवार की सुबह से ही रामगोविंद चौधरी के पैतृक आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर विद्यार्थी, सांसद रामभुआल निषाद, जमानियां विधायक ओमप्रकाश सिंह, फेफना विधायक संग्राम यादव, समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद गिरि, समाजवादी पार्टी महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा राजभर बागी, सकलडीहा विधायक एवं स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के समधी प्रभु नारायण सिंह यादव, सिकंदरपुर विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी, पूर्व भाजपा विधायक संजय यादव, सपा जिलाध्यक्ष देवरिया व्यास जी यादव, स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा, सपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष पुनीता सिंह सोनी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भुवनेश्वर चौधरी, भाजपा नेता संजीव वर्मा, सपा जिला प्रवक्ता सुशील पांडेय 'कान्ह जी', मीरजापुर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर यादव, एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू, तेज सिंह, ममता सिंह, विकेश सिंह, सोनू सिंह, सदर के सपा नेता रामजी यादव, नवानगर के पूर्व ब्लाक प्रमुख विवेक सिंह और नगर पंचायत सिकंदरपुर के प्रतिनिधि संजय जायसवाल समेत बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
रामगोविंद चौधरी के अंतिम दर्शन के दौरान कई नेता और समर्थक भावुक नजर आए। समाजवादी पार्टी महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा राजभर बागी पार्थिव शरीर के सामने पहुंचते ही भावुक हो गईं। श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद वह फफक-फफक कर रो पड़ीं। वहां मौजूद महिलाओं ने उन्हें संभाला। वहीं, सकलडीहा विधायक एवं स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी के समधी प्रभु नारायण सिंह यादव भी अंतिम दर्शन के दौरान अपने आंसू नहीं रोक सके।
दोनों नेताओं की भावुकता का दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भी द्रवित हो उठे। अंतिम दर्शन के दौरान छलके आंसू और अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि रामगोविंद चौधरी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में लोगों के साथ केवल राजनीतिक संबंध ही नहीं बनाए, बल्कि उनके बीच आत्मीय रिश्ते भी कायम किए थे। यही आत्मीयता उनकी अंतिम विदाई के दौरान गोसाईंपुर में उमड़ीभीड़ के रूप में दिखाई दी।
