प्रकृति संरक्षण का संदेश लेकर बिहार से यूपी पहुंची ‘प्रगति पथ यात्रा’, भरौली, नरही और बघई में स्वागत
पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में 'प्रगति पथ यात्रा' बिहार से उत्तर प्रदेश के बलिया पहुंची, जहाँ प्रकृति ...और पढ़ें

प्रगति पथ यात्रा का बलिया में भव्य स्वागत प्रकृति संरक्षण का संदेश।
HighLights
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की 'प्रगति पथ यात्रा' बलिया पहुंची।
पर्यावरण संरक्षण, जन-जागरूकता का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।
स्थानीय लोगों, छात्रों ने यात्रा का उत्साह से स्वागत किया।
जागरण संवाददाता, बलिया। प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संदेश लेकर पद्मभूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् डा. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में निकली अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा ‘प्रगति पथ यात्रा, पेडल फार नेचर’ 22 अक्टूबर को बिहार से उत्तर प्रदेश पहुंची।
दो अक्टूबर 2026 को जनकपुर धाम से शुरू हुई यह यात्रा विभिन्न गांवों, कस्बों और शहरों से गुजरते हुए लोगों से सीधा संवाद कर रही है। इसका उद्देश्य प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझाना तथा पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है।
उत्तर प्रदेश में प्रवेश के बाद बलिया जिले के भरौली, नरही और बघई में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों ने यात्रा दल का भव्य स्वागत किया। डा. जोशी और उनके साथ साइकिल यात्रा कर रहे सदस्यों का फूल-मालाओं से अभिनंदन किया गया।
बघई में ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक स्वागत हुआ। बुलडोजर से पुष्पवर्षा की गई, जबकि घरों से महिलाओं ने फूल बरसाकर यात्रियों का स्वागत किया। समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण के संदेश के प्रति उनके जुड़ाव को प्रदर्शित किया।

सेवानिवृत्त प्राध्यापक के आवास पर आत्मीय स्वागत
यात्रा के दौरान सेवानिवृत्त प्राध्यापक हीरानंद सिंह के आवास पर भी डा. अनिल प्रकाश जोशी का आत्मीय अभिनंदन किया गया। हीरानंद सिंह ने पुष्पार्पण कर उनका सम्मान किया, जबकि घर की महिलाओं ने फूल बरसाकर यात्रा दल का स्वागत किया। इस अवसर पर गांव की एक ऐसी परंपरा सामने आई, जो प्रकृति संरक्षण के साथ सामाजिक एकता, सहयोग और साझा खुशियों का संदेश देती है।
दो बीघा में आम का बगीचा, पूरे गांव के लोग साझा करते फल
गांव में लगभग दो बीघा जमीन पर मित्र मंडली ने आम का बगीचा विकसित किया है। इसकी खासियत यह है कि फलों को बाजार में बेचने के बजाय पूरे गांव के लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाता है। आसपास के गांवों से भी लोग यहां आम खाने आते हैं। हीरानंद सिंह ने बताया कि इस बगीचे को व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोगों के साथ खुशियां बांटने और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
आज जब पेड़ों और जमीन को अक्सर आर्थिक लाभ के नजरिये से देखा जाता है, ऐसे में यह बगीचा एक अलग संदेश देता है। पेड़ केवल फल देने वाले संसाधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, आपसी सहयोग बढ़ाने और सामूहिक खुशियां बांटने का माध्यम भी हैं। प्रकृति से मिलने वाले उपहारों को केवल व्यक्तिगत अधिकार तक सीमित रखने के बजाय समाज के साथ साझा करना पर्यावरण के प्रति सम्मान का रूप है। यह परंपरा बताती है कि पौधारोपण का वास्तविक महत्व तभी है, जब उससे मनुष्य, समाज और प्रकृति सभी को लाभ मिले। ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने, उन्हें साझा करने और मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा दे सकते हैं।
हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल
गांव में विभिन्न धर्मों के लोग आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के साथ रहते हैं। इसकी एक विशेष पहचान यह भी बताई गई कि यहां मांस-मछली और अंडे की दुकानें नहीं हैं तथा ग्रामीणों ने इस जीवनशैली को अपनाया है। प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक सहभागिता, साझा संसाधनों के उपयोग और धार्मिक सद्भाव का यह मेल गांव को विशिष्ट पहचान देता है। यह उदाहरण बताता है कि किसी गांव की समृद्धि केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव, सामाजिक एकता, सहयोग और साझा जीवन-मूल्यों से भी तय होती है।
विद्यालय में बच्चों से संवाद, प्रकृति संरक्षण की दी सीख
‘प्रगति पथ यात्रा’ का एक महत्वपूर्ण पड़ाव आदर्श शिक्षण संस्थान, आसापुर, चितबड़ागांव रहा। विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती कमला सिंह, प्रधानाचार्या प्रज्ञा चतुर्वेदी और शिक्षकों ने डा. अनिल प्रकाश जोशी का स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों से सहज और रोचक अंदाज में संवाद किया। बच्चों से प्रकृति की परिभाषा और जीवन में उसके महत्व के बारे में पूछा।
डा. जोशी ने समझाया कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जिस पानी को पीते हैं और जिस मिट्टी में अन्न उगता है, वे सभी प्रकृति के अनमोल उपहार हैं। स्वच्छ हवा, साफ पानी और उपजाऊ मिट्टी के बिना जीवन संभव नहीं है। प्रकृति मानव जीवन का आधार है और उसकी रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों से घर जाकर प्रकृति के बारे में सोचने और उसके संरक्षण की शुरुआत अपने जीवन से करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का सम्मान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए।
जल बचाना, पेड़-पौधों की रक्षा करना, स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण को नुकसान से बचाना भी प्रकृति के प्रति सम्मान के महत्वपूर्ण रूप हैं। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी बच्चों का उत्साह बना रहा। अनेक विद्यार्थी साइकिल यात्रा दल के साथ सड़क पर लगभग 100 से 200 मीटर तक पैदल चले। कार्यक्रमों और स्वागत समारोहों में स्थानीय महिलाएं, पुरुष तथा अन्य ग्रामीण भी शामिल हुए। बच्चों की भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण के संदेश के प्रति लोगों के जुड़ाव और प्रकृति को लेकर विद्यार्थियों की जिज्ञासा को प्रदर्शित किया।

स्थानीय लोगों को यात्रा के उद्देश्य की जानकारी दी
उत्तर प्रदेश में यात्रा के समन्वयक भाऊ राम जी ने स्थानीय लोगों को यात्रा के उद्देश्य और उसके संदेश से परिचित कराया। चितबड़ागांव स्थित मर्चेंट इंटर कॉलेज के प्रवक्ता हिरानंद सिंह भी यात्रा से जुड़े रहे। यात्रा के माध्यम से जल, वायु और मिट्टी के प्रदूषण, वनों की कटाई तथा प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन जैसे पर्यावरणीय संकटों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
लोगों को प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यात्रा दल विभिन्न स्थानों पर संवाद के माध्यम से यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण की रक्षा किसी एक व्यक्ति, संस्था या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।
संजय कुमार उर्फ बबलू भैया ने जताया आभार
इस अवसर पर संजय कुमार उर्फ बबलू भैया ने डा. अनिल प्रकाश जोशी और उनकी पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन साइकिल यात्रा के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर लोगों को प्रकृति संरक्षण, समाज के बेहतर जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संदेश देना प्रेरणादायक कार्य है। उन्होंने अपने गांव और आइबीएसएफ के सभी साथियों की ओर से डा. जोशी तथा पूरी यात्रा टीम को धन्यवाद दिया। साथ ही कामना की कि यात्रा सफलतापूर्वक आगे बढ़े और इसका संदेश जन-जन तक पहुंचे।
जनभागीदारी से प्रकृति संरक्षण का संदेश
‘प्रगति पथ यात्रा, पेडल फार नेचर’ का उद्देश्य केवल लंबी दूरी तय करना नहीं, बल्कि लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर प्रकृति संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है। यात्रा यह संदेश दे रही है कि विकास की प्रक्रिया में प्रकृति का संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल, उपजाऊ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।
इसके लिए सरकार, संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। पर्यावरणीय संकटों का समाधान नीतियों और बड़े अभियानों के साथ व्यक्तिगत जिम्मेदारी, सामुदायिक सहयोग तथा दैनिक जीवन में प्रकृति के अनुकूल व्यवहार अपनाने से भी संभव है।
बलिया जिले में 22 अक्टूबर को यात्रा के इस पड़ाव पर भरौली, नरही और बघई में भव्य स्वागत, बुलडोजर से पुष्पवर्षा, घरों से महिलाओं द्वारा फूल बरसाकर अभिनंदन, हीरानंद सिंह के आवास पर आत्मीय स्वागत, विद्यालय में बच्चों से संवाद और विद्यार्थियों का यात्रा दल के साथ पैदल चलना प्रमुख आकर्षण रहे। लगभग दो बीघा में विकसित आम के बगीचे की साझा परंपरा और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इन गतिविधियों ने दिखाया कि प्रकृति संरक्षण का संदेश केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं है।
इसे सामुदायिक जीवन, बच्चों की शिक्षा, पौधारोपण, प्राकृतिक संसाधनों को साझा करने और सामाजिक सौहार्द मजबूत करने जैसे प्रयासों के जरिए व्यवहार में उतारा जा सकता है। ‘प्रगति पथ यात्रा’ लोगों को प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन के आधार और आने वाली पीढ़ियों की साझा धरोहर के रूप में देखने के लिए प्रेरित कर रही है। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहयोग और जिम्मेदार जीवनशैली ही सुरक्षित एवं संतुलित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

बलिया में पर्यावरण गोष्ठी और विद्यार्थियों से संवाद करेंगे डा. अनिल प्रकाश जोशी
प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता का संदेश लेकर निकली अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा ‘प्रगति पथ यात्रा, पेडल फार नेचर’ के तहत 23 अक्टूबर को बलिया में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डा. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में पहुंची यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर गोष्ठी, विद्यार्थियों से संवाद और स्वागत समारोह होंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 10 बजे जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया में पर्यावरण गोष्ठी आयोजित होगी। इसके बाद दोपहर एक बजे खेजुरी बाजार स्थित आनंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को प्रकृति के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। यात्रा दल का सूर्या नर्सिंग कॉलेज, पंदह में प्रबंधक रवि राय के नेतृत्व में स्वागत समारोह आयोजित होगा। इसके अलावा सिकंदरपुर रोडवेज पर प्रकाश सिंह की ओर से स्वागत किया जाएगा।
यात्रा दल का रात्रि विश्राम डुहा बिहरा स्थित वनखंडीनाथ मठ में होगा। यहां सत्येंद्र यादव राजू जी की ओर से व्यवस्था की गई है। ‘प्रगति पथ यात्रा, पेडल फार नेचर’ का उद्देश्य पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और प्रकृति संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है। यात्रा के माध्यम से लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया जा रहा है।
