जागरण संवाददाता, रसड़ा (बलिया) : ¨जदगी में मां, महात्मा व परमात्मा से बढ़कर कुछ भी नहीं है। जीवन में तीनों का आशीर्वाद जरूरी है। बचपन में मां का, जवानी में महात्मा का और बुढ़ापे में परमात्मा का। मां बचपन को संभाल देती है, महात्मा जवानी सुधार देता है व बुढ़ापे को परमात्मा संभाल लेते हैं। उक्त बातें मानस मर्मज्ञ प्राज्ञी साधना ने बुधवार की रात कहीं। वह रसड़ा क्षेत्र के सिसवार कला गांव में विश्व मंगल परिवार सेवा संस्थान द्वारा आयोजित महाचंडी यज्ञ व श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस एक ऐसा ग्रंथ है जिसको व्यक्ति अपने आचरण में उतार ले तो निश्चित ही सामाजिक बुराइयों को परित्याग कर भगवान के करीब हो जाएगा। बताया कि अनजाने में किया गया पाप भी बहुत कष्टकारी होता है जैसा कि महाराजा दशरथ द्वारा श्रवण को अनजाने में मारने पर उन्हें जीते जी ही अनेकानेक कष्टों का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम संयोजक प्रदीप ¨सह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

Posted By: Jagran

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