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प्रकृति ही सबसे बड़ा धर्म, विकास के नाम पर विनाश रोकना जरूरी: डा. अनिल प्रकाश जोशी

By Vns Milan K. Gupta Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 23 Oct 2026 04:40 PM (IST)

पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने बलिया में 'प्रगति पथ यात्रा' के दौरान पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर जोर ...और पढ़ें

डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने बलिया में कहा प्रकृति सबसे बड़ा धर्म विकास के नाम पर विनाश रोकें।

डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने बलिया में कहा प्रकृति सबसे बड़ा धर्म विकास के नाम पर विनाश रोकें।

HighLights

  1. प्रकृति सबसे बड़ा धर्म, विकास में संतुलन आवश्यक।

  2. मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से सामाजिक संवाद प्रभावित।

  3. पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

जागरण संवाददाता, बलिया। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और प्रकृति के प्रति जनजागरूकता का संदेश लेकर निकली पद्मभूषण डा. अनिल प्रकाश जोशी की ‘प्रगति पथ यात्रा नेचर नेटवर्क, पेडल फार नेचर’ के 22वें दिन शुक्रवार को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।

इसके बाद यात्रा खेजुरी आनंद शिक्षण संस्थान पहुंची, जहां लगभग 1200 विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उनका स्वागत किया। दोनों कार्यक्रमों में डा. जोशी ने प्रकृति संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों पर विचार रखे।

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जेएनसीयू के कृषि संकाय की ओर से आयोजित ‘पर्यावरण संरक्षण : चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डा. जोशी ने कहा कि प्रकृति ही सबसे बड़ा धर्म है। स्वच्छ हवा, जल और मिट्टी के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन गंभीर चुनौतियां हैं।

मनुष्य ने अपनी विलासिता और लालच में प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कृषि में रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की।

कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें मानवीय सुविधाओं के साथ पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए। कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल ने अध्यक्षीय संबोधन में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। टीडी कॉलेज के प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करके ही स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

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मोबाइल लोगों को जोड़ने की बजाय तोड़ रहा
डा. जोशी ने विद्यार्थियों को मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के प्रति आगाह करते हुए कहा कि आज लोग अपनों के साथ बैठकर बातचीत करने के बजाय मोबाइल स्क्रीन में व्यस्त रहते हैं। मोबाइल जोड़ने से ज्यादा लोगों को वास्तविक रिश्तों और सामाजिक संवाद से दूर कर रहा है। इसका उपयोग शिक्षा और ज्ञान के लिए होना चाहिए, लेकिन इसके कारण प्रकृति और समाज से जुड़ाव कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने और शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखने की अपील की। कहा कि युवाओं को संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज तथा पर्यावरण के हित में योगदान देना चाहिए।

पौधरोपण कर प्राकृतिक संरचना बचाने पर दिया जोर
विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल और प्राध्यापकों ने डा. जोशी का स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इस दौरान डा. जोशी ने परिसर में शीशम का पौधा लगाया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल भी जरूरी है। पौधों का चयन स्थानीय मिट्टी, जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित तालाब का अवलोकन कर उसकी सफाई और प्राकृतिक संरचना सुरक्षित रखने के सुझाव दिए। कहा कि सुंदरता बढ़ाने के नाम पर प्राकृतिक स्थलों के मूल स्वरूप से अत्यधिक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए, क्योंकि तालाब स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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खेजुरी में 1200 विद्यार्थियों ने किया अभिनंदन
विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के बाद यात्रा खेजुरी आनंद शिक्षण संस्थान पहुंची। यहां लगभग 1200 विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रिंसिपल और महाप्रबंधक ने फूल-मालाओं से डा. जोशी का स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति को जीवन का अभिन्न अंग मानने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया। डा. जोशी ने कहा कि साइकिल यात्रा का उद्देश्य केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना नहीं, बल्कि गांवों, शहरों और शिक्षण संस्थानों में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर संवाद स्थापित करना है। यात्रा में शामिल युवा कठिनाइयों का सामना करते हुए विभिन्न क्षेत्रों से सीख रहे हैं और प्रकृति संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों और जैव विविधता के संरक्षण को भी मानवता की जिम्मेदारी बताया।

पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
संगोष्ठी में कृषि और पर्यावरण के परस्पर संबंध, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के बाद जनकपुर, नेपाल से देहरादून, उत्तराखंड तक जाने वाली राष्ट्रीय साइकिल यात्रा के लिए भिक्षाटन भी किया गया। इस अवसर पर निदेशक शैक्षणिक डा. पुष्पा मिश्रा, कुलानुशासक डा. प्रियंका सिंह, कृषि संकाय अध्ययन समिति के समन्वयक प्रो. बृजेश कुमार सिंह, डा. संजीव कुमार, डा. लाल विजय सिंह, डा. अमर सिंह, डा. निधि सिंह, डा. चंद्रशेखर प्रजापति, डा. उपेंद्र मौर्य सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। खेजुरी आनंद शिक्षण संस्थान में प्रिंसिपल कृष्ण कुमार पांडेय, जहांगीर आलम, प्रबंधक घनश्याम सिंह और पूर्व जिला पंचायत सदस्य सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।