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माओवादी संगठन से जुड़ा था हत्यारोपित राजकुमार वर्मा, वर्ष 2012 से ही था बल‍िया से फरार

By Vns Milan K. Gupta Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 25 Sep 2026 04:41 PM (IST)

50 हजार के इनामी हत्यारोपित राजकुमार वर्मा उर्फ प्रदीप वर्मा को एसटीएफ ने असम के गुवाहाटी से गिरफ्तार किया है, ...और पढ़ें

माओवादी संगठन से जुड़ा 50 हजारी हत्यारोपित राजकुमार वर्मा गुवाहाटी से गिरफ्तार।

माओवादी संगठन से जुड़ा 50 हजारी हत्यारोपित राजकुमार वर्मा गुवाहाटी से गिरफ्तार।

HighLights

  1. 50 हजार इनामी हत्यारोपित राजकुमार वर्मा गुवाहाटी से गिरफ्तार।

  2. वर्ष 2012 से फरार था, माओवादी संगठन से जुड़ा।

  3. एनआईए कर रही है माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच।

जागरण संवाददाता, बलिया। 50 हजार रुपये के इनामी हत्यारोपित राजकुमार वर्मा उर्फ प्रदीप वर्मा को एसटीएफ ने असम के गुवाहाटी से गत गुरुवार को गिरफ्तार किया। सहरसपाली गांव निवासी राजकुमार वर्ष 2012 से ही फरार था और उसके खिलाफ सहतवार थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज था।

एसटीएफ निरीक्षक अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने उसे वशिष्ठ थाना क्षेत्र के बकरापाड़ा रोड से उसे पकड़ा था। एसटीएफ के अनुसार, सोहन सिंह की हत्या के बाद राजकुमार का संपर्क प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़े सीताराम उर्फ धनु से हुआ। इसके बाद वह माओवदी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था। पुलिस के मुताबिक, ग्राम प्रधान मुसाफिर चौहान के पुलिस को सूचना देने की आशंका में वर्ष 2012 में राजकुमार अपने साथियों के साथ पुलिस की वर्दी पहनकर उनके घर पहुंचा।

प्रधान के नहीं मिलने पर उनकी पत्नी फूलमती को बाहर बुलाकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में कई आरोपित गिरफ्तार हुए थे, जबकि राजकुमार फरार हो गया था। एसटीएफ के मुताबिक, वर्ष 2007 में दुकानदारी विवाद में माधव ठाकुर के परिवार से मारपीट और 2008 में जयंत ठाकुर को गोली मारने का भी राजकुमार पर आरोप था।

इसी वर्ष अपने भाई की हत्या में सोहन सिंह गुट का हाथ होने की आशंका में उसने सोहन सिंह की हत्या कर दी थी। राजकुमार के सहयोगी सीताराम उर्फ धनु पर भी 50 हजार रुपये का इनाम था, जिसे 15 दिसंबर 2025 को एटीएस ने वाराणसी से गिरफ्तार किया था।यह भी 13 वर्ष बाद एटीएस के हाथ लगा था। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता ने वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन से पकड़ा था।

नाम और वेष बदलकर रह रहा था राजकुमार, एनआइए भी कर रही जांच
जिस तरह सीताराम नाम और वेश बदलकर इधर-उधर रह रहा था, ठीक उसी तरह राजकुमार भी अपना नाम और वेश परिवर्तित कर इतने दिनों तक असम के गुवाहाटी में छिपा रहा। सीताराम ने वर्ष 1986 में ही घर छोड़ दिया था और माओवादी संगठनों से जुड़ गया था।

साल 1990 में वह सेकेंड सेंट्रल कमेटी का जोनल सेक्रेटरी बना था। 15 अगस्त 2023 को राजकुमार व सीताराम अपने साथियों के साथ एक बैठक कर रहे थे। सूचना मिलने पर जब पुलिस पहुंची तो ज्यादातर फरार हो गए लेकिन मौके से माओवादी साहित्य और हथियार बरामद किए गए थे। इस संबंध में एटीएस लखनऊ में दर्ज मुकदमे की विवेचना वर्तमान में एनआइए कर रही है।

यूपी के अलावा बिहार में छिपाते थे हथियार
सीताराम से संपर्क में आने के बाद राजकुमार पूरी तरह माओवादी विचारधारा को अपना लिया था। दोनों ने मिलकर यूपी के अलावा बिहार के मुजफ्फरपुर, बांका और सीतामढ़ी में कई आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया। सीताराम के खिलाफ बैंक डकैती, हत्या, मारपीट और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। इसके अलावा राजकुमार पर भी दंगा भड़काने, घातक हथियार से हमला करने, गैरकानूनी जमावड़ा, हत्या व हत्या के प्रयास समेत अवैध रूप से हथियार या गोला-बारूद रखने, बनाने व बेचने तक का मुकदमा दर्ज है।