जयप्रकाश नारायण 1978 में अंतिम बार आए थे सिताबदियारा, निधन पर रो पड़ा था गांव
जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर सिताबदियारा गांव उन्हें याद कर रहा है। 1978 में अपनी अंतिम यात्रा के दौरान उन्होंने ...और पढ़ें

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि: सिताबदियारा में आज भी ताजा हैं उनकी अंतिम यात्रा की यादें।
HighLights
जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर सिताबदियारा गांव उन्हें याद कर रहा है।
1978 में जेपी ने अपने गांव सिताबदियारा में तीन दिन बिताए थे।
अंतिम विदाई के समय हेलीकॉप्टर से पूरे गांव का दौरा किया।
लवकुश सिंह, जागरण, बलिया। संपूर्ण क्रांति के नायक जयप्रकाश नारायण यानी जेपी की आज पुण्यतिथि है। उनके हौसले से 1974 में केंद्र सरकार डगमगा गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर सिताबदियारा में कोई बड़ा कार्यक्रम तो नहीं होता, लेकिन गांव के लोग उन्हें अपने अंदाज में जरूर नमन करते हैं। 11 अक्टूबर 1902 को सिताबदियारा में जन्मे जयप्रकाश नारायण के निधन की सूचना आठ अक्टूबर 1979 को जब उनके गांव पहुंची थी, तब सिताबदियारा का कोना-कोना रो पड़ा था।
सभी लोग जेपी के निवास की ओर दौड़ पड़े थे। कई लोग उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए उसी समय पटना के लिए निकल गए थे। गांव के बुजुर्ग जैनेंद्र कुमार सिंह व श्रीराम यादव ने बताते हैं कि जेपी जब अंतिम बार 07 सितंबर 1978 को अपने घर सिताबदियारा के जयप्रकाशनगर आए थे तो यहां तीन दिन रहे थे।
उस समय की याद आज भी दलजीत टोला निवासी बुजुर्ग आनंद बिहारी सिंह के मन में ताजा है। वह बताते हैं कि शाम ढलने के बाद जब जेपी आंगन में बैठे थे, तो घर के पिछले दरवाजे से गांव की कई महिलाएं उन्हें देखने पहुंच गईं। कई महिलाएं उनके चरण स्पर्श कर प्रणाम करने लगीं। संकोच में जेपी भोजपुरी में बोले, “आपलोगन के हमार पैर ना छुए के चाही।”
तभी एक बुजुर्ग महिला ने सहज भाव से कहा, “राउर इ नातिन पतोह लगिहें।” यह सुनकर जेपी मुस्कराए और बोले, “अच्छा, ठीक बा।” महिलाएं देर तक उनका आशीर्वाद लेती रहीं। उस यात्रा में चंद्रशेखर जी हर पल उनके साथ थे। तीसरे दिन विदा होने का समय आया तो जेपी ने कहा, “चंद्रशेखर, तनी हमार गांव दिखा द।” इसके बाद वह चंद्रशेखर को अपने हेलीकाप्टर में बैठाकर पूरे सिताबदियारा के दो चक्कर लगाए। नीचे खड़ी भीड़ ‘लोकनायक जिंदाबाद’ के नारों लगा रही थी।
हेलीकाप्टर नीचे उतरा तो जेपी कुछ पल खड़े होकर अपनों को निहारते रहे। भीड़ की आंखें नम थीं और विदाई का यह समय जेपी के लिए भी असहनीय था। फिर हेलीकाप्टर उड़ा और कुछ देर बाद आंखों से ओझल हो गया। उसके बाद जेपी नहीं लौटे। जेपी नारायण स्मारक प्रतिष्ठान के व्यवस्थापक अशोक सिंह बताते हैं कि उनकी पुण्यतिथि पर स्कूली बच्चे और ग्रामीण प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन करेंगे।
