बलिया : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि यूपी पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) के कर्मचारियों के भविष्य निधि के 4000 करोड़ रुपये को दीवान हाउसिग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफसीएल)  को देना सीधे-सीधे लूट है। इतनी बड़ी लूट ऊर्जा मंत्री, पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन और ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव की जानकारी के बगैर हो ही नही सकती। इसलिए इस मामले में इन तीनों को तत्काल बर्खास्त किया जाए। आरोपितों को जेल में डाला जाये और इस लूट की जांच हाईकोर्ट के वर्तमान जज से करायी जाय।

दूरभाष पर बातचीत में रामगोविद ने कहा कि भाजपा के शासन काल में मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच बड़ी धनराशि डीएचएफसीएल को ट्रांसफर की गई। इसकी जांच में ही शासन ने पाया कि कर्मचारियों के भविष्य निधि का 2268 करोड़ रुपया फंस गया। इस मामले में दो अधिकारी गिरफ्तार भी किये गये हैं। केवल दो अधिकारी इतनी बड़ी धनराशि नहीं ट्रांसफर कर सकते। कहा कि इसी तरह की लूट महाराष्ट्र के पीएमसी बैंक में भी हुई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लुटे जा चुके हैं। मंत्री और अफसर अपनी जान बचाने के लिए सफाई दे रहे हैं। इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए हाईकोर्ट के वर्तमान जज से जांच कराना जरूरी है।

Posted By: Jagran

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