बलिया में सरयू की बाढ़ ने जान सांसत में डाली, एनडीआरएफ ने राहत अभियान चलाकर बचाई 100 जिंदगियां
सरयू नदी के प्रचंड उफान ने बलिया के बांसडीह में भोजपुरवा इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे सैकड़ों ...और पढ़ें
HighLights
सरयू नदी के उफान से बलिया का भोजपुरवा इलाका जलमग्न।
एनडीआरएफ ने सोमवार सुबह बचाव अभियान चलाकर लोगों को बचाया।
बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित तटबंधों पर पहुंचाया गया।
जागरण संवाददाता, बांसडीह (बलिया)। सरयू के प्रचंड उफान ने बांसडीह के भोजपुरवा इलाके को अपनी आगोश में ले लिया है। चारों तरफ फैले अथाह पानी ने सैकड़ों जिंदगियों को रविवार शाम मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था। इसकी वजह से जान बचाने की कोशिश के बाद प्रशासन ने मोर्चा संभाला।
सूचना पाकर एसडीएम डा. पुष्कर मिश्रा और पुलिस क्षेत्राधिकारी जयशंकर मिश्र के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला रविवार शाम ढलते ही मैदान में उतर चुका था। लेकिन घनघोर अंधेरे और उफनती लहरों के बीच किसी भी संभावित हादसे से बचने के लिए रात को हाथ थामे रखा गया।

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जैसे ही सोमवार की सुबह सूरज की रोशनी बिखरी, एनडीआरएफ के जांबाज जवानों ने अपनी मोटरबोट्स के साथ पानी के साम्राज्य पर धावा बोल दिया। प्राथमिकता पर बुजुर्ग, मासूम बच्चे और महिलाएं रहीं। एक एक घर तक पहुंचकर परिवारों को राशन सामान सहित सुरक्षित तटबंधों (बंधे) तक लाया गया।
नदी के गेज पर दर्ज आंकड़ों में हल्की नरमी देखी गई है। लेकिन भले ही जलस्तर में कुछ सेंटीमीटर की कमी आई हो, लेकिन धरातल पर तबाही का मंजर जस का तस बना हुआ है। सोमवार को भी दुश्वारी जस की तस बनी रहने और बारिश की सूरत बनने से लोग परेशान नजर आए।

खौफनाक रात के बाद उम्मीद का किनारा
गांव के मुन्ना यादव, राजेंद्र, संजय, हीरालाल, सुधीर श्रीराम ,योगेंद्र ,स्वामीनाथ राधाकृष्ण, मुनिलाल, मुकेश, धनजी, बलराम, और जवाहर यादव समेत दर्जनों परिवारों ने वो खौफनाक रात छतों पर काटते हुए गुजारी। सोमवार सुबह जब बचाव दल की नावें उनके किवाड़ तक पहुंचीं, तब जाकर ग्रामीणों की आंखों में जिंदगी की चमक लौटी। फिलहाल सभी विस्थापितों को सुरक्षित बंधे पर अस्थायी शिविरों में पहुंचाया जा चुका है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
भोजपुरवा में देर शाम से जलभराव के कारण गांव में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। इनमे से अधिकतर लोगों के बंधे किनारे आस पास के गांवों में अपना मकान है। जिनके पास व्यवस्था नही है। उन्हें पर्वतपुर प्राथमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में रखा जा रहा है। उनके भोजन पानी व मवेशियों के चारे पानी की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।
