जागरण संवाददाता, बलिया : गंगा में उफान के कारण बैरिया-बलिया सड़क के दक्षिण बसे गांवों की बाढ़ के पानी से घिरते जाने के कारण स्थिति गंभीर बनती जा रही है। बैरिया तहसील क्षेत्र में नौका की व्यवस्था न होने के कारण कई गांवों के लोगों को आवागमन हेतु परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जवही दियर व नौरंगा-भुवाल छपरा का आवागमन मुख्यालय से बाधित हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी जवही दियर व नौरंगा से दूध लेकर आने वाले दूधियों को हो रही है। वहीं बाढ़ से घिरे गांवों में डायरिया, वायरल फीवर के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। गंगा के बाढ़ के पानी से घिरे केहरपुर, सुघर छपरा, गंगापुर के चौबेछपरा, बनिया टोला, सोनार टोला के लोगों के घरों में पानी घुसने से परेशानी बढ़ गई है। केहरपुर, मझौवां, पोखरा व बाबूबेल के सभी प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल तथा महावीर ¨सह इंटरमीडिएट कालेज बादिलपुर बाढ़ के कारण बंद कर दिए गए हैं। कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने लगे हैं। मंगलवार के दिन केंद्रीय जल आयोग के केंद्र गायघाट में दिन के 12 बजे गंगा का जलस्तर 58.84 मीटर दर्ज किया गया। गंगा प्रति घंटा एक सेमी की रफ्तार से बढ़ाव पर है। बढ़ते जलस्तर को देखकर जनपदीय अधिकारी व बाढ़ खंड के लोग बाढ़ क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं ¨कतु राहत के नाम पर अभी कोई सहायता नहीं मिल रही है।

बाढ़ क्षेत्र में पशुपालन विभाग नहीं सक्रिय

बाढ़ क्षेत्र में लेखपाल, सफाईकर्मी तो पहुंच रहे हैं ¨कतु पशु पालन विभाग के लोगों की उपस्थिति नहीं होने के कारण पशुपालकों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई है। बाढ़ से घिरे गांवों में स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, विद्युत आपूर्ति बंद कर देने से लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। केहरपुर से लेकर उदवंत छपरा तक गंगा के बाढ़ के पानी का फैलाव तेजी से हो रहा है। जिस कारण अब जन जीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। गायघाट में मीडियम फ्लड लाइन 58.725 मीटर है। वहीं हाईफ्लड लाइन 60.250 मीटर है।

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