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बल‍िया में सरयू की कटान ने छीनी छत, जमीन और खुशियां, बेघर परिवारों की जिंदगी बनी बदहाल

By Ravindra Kumar Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 28 Aug 2026 03:27 PM (IST)

बलिया के बैरिया में सरयू नदी की कटान ने गोपालनगर टांड़ी के दर्जनों परिवारों को बेघर कर दिया है, जिससे ...और पढ़ें

सरयू नदी की कटान से बलिया में सैकड़ों परिवार बेघर, जीवनयापन मुश्किल।

सरयू नदी की कटान से बलिया में सैकड़ों परिवार बेघर, जीवनयापन मुश्किल।

HighLights

  1. सरयू नदी की कटान से दर्जनों परिवार बेघर हुए।

  2. गोपालनगर टांड़ी में छत और जमीन का संकट।

  3. प्रशासन से स्थायी समाधान और मदद की उम्मीद।

जागरण संवाददाता, बैरिया (बलिया)। सुरेमनपुर दियरांचल के गोपालनगर टांड़ी में सरयू नदी की कटान ने दर्जनों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है। किसी का आशियाना नदी में समा गया तो किसी के घर पर अब भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। मकान गंवा चुके परिवारों के सामने सिर छुपाने के लिए छत और बसने के लिए जमीन तक का संकट खड़ा है।

दो जून की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में कटान पीड़ित परिवार न तो पर्व-त्योहार मना पा रहे हैं और न ही बेटा-बेटियों की शादी जैसे पारिवारिक आयोजन हर्षोल्लास से कर पा रहे हैं।गोपालनगर टांड़ी के गणेश यादव, पिंटू यादव, पप्पू यादव, मुखराम यादव सहित दर्जनों कटान पीड़ितों ने सरकार पर उपेक्षा और भेदभाव का आरोप लगाया है।

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उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार आश्वासन तो मिलते रहे, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में करीब 300 परिवार कटान के कारण बेघर हो चुके हैं। अभी भी दर्जनों परिवारों के मकान सरयू नदी के मुहाने पर हैं और किसी भी समय नदी की धारा उन्हें अपनी चपेट में ले सकती है।

वहीं गोपालनगर पश्चिम टोला के सामने भी सरयू की कटान लगातार जारी है। टांड़ी निवासी किशन यादव, शिवनारायण यादव, जगलाल यादव, मंतोष यादव तथा पश्चिम टोला निवासी राजू सिंह, अमरजीत साहनी, पूर्व प्रधान प्रदीप यादव और प्रधान प्रतिनिधि अर्जुन यादव आदि ने बताया कि पांच वर्षों से जारी कटान ने ग्रामीणों का सब कुछ छीन लिया है। बावजूद इसके प्रभावित परिवारों को बसने के लिए जमीन और अन्य जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।

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बटाई की जमीन पर झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर

कटान पीड़ितों का आरोप है कि बेघर होने के बाद वे बटाई की जमीन पर किसी तरह झुग्गी-झोपड़ी बनाकर जीवन गुजार रहे हैं। हर समय नदी की कटान और विस्थापन का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2025 में तहसील प्रशासन ने चांद दियर मौजा के बकुल्हां रेलवे स्टेशन के समीप कटान पीड़ितों को पट्टे पर आवासीय जमीन उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था।

पीड़ितों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें स्थायी रूप से बसने के लिए जमीन मिल जाएगी, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी जमीन नहीं मिल सकी।कटान पीड़ितों का कहना है कि सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से आश्वासन के अलावा उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। सरकार से भी समुचित सहायता नहीं मिलने के कारण उनका जीवन लगातार संकटों से घिरा हुआ है।

कटान पीड़ितों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन

इस संबंध में उपजिलाधिकारी बैरिया शशिभूषण मिश्र ने बताया कि कटान पीड़ितों की समस्याओं को लेकर प्रशासन गंभीर है। जो भी संभव होगा, कटान पीड़ितों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।