जागरण संवाददाता, बलिया : शिक्षक पात्रता परीक्षा का परिणाम शैक्षणिक स्तर का सच बयां करने के लिए पर्याप्त है। परिणाम घोषित होने के बाद एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। लोगबाग परीक्षा परिणाम पर जमकर चुटकी ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार भले ही शिक्षा विभाग की दशा सुधारने पर आमादा है लेकिन जब तक बुनियादी शिक्षा की नींव मजबूत नहीं होगी तक तक बेहतर की उम्मीद करना कोरी कल्पना ही है।

लोगों को कहना है कि सुधार के सभी सरकारी प्रयास झूठ की ढ़ेर पर खड़ा हैं। शिक्षक पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण प्रतिभागियों का आंकड़ा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। घोषित परिणाम के अनुसार प्राथमिक स्तर में 30 फीसद और उच्च प्राथमिक स्तर में 11.46 फीसद परीक्षार्थी ही उत्तीर्ण हैं। जनपदीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में प्राथमिक स्तर की टेट परीक्षा में कुल 18852 के सापेक्ष 16025 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इसका 30 फीसद यानी लगभग 4800 परीक्षार्थी ही प्राथमिक शिक्षक बनने की पहली पायदान को पार कर पाए हैं। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में 8138 परीक्षार्थी थे, इनमें 6755 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इसका 11.46 प्रतिशत यानि लगभग 774 परीक्षार्थी ही परीक्षा पास कर पाए हैं। निस्संदेह यह आंकड़ा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ ही समाज की आंख खोलने वाला है। शिक्षा व्यवस्था का भी है यह रिजल्ट

शिक्षा जगत के जानकार मानते हैं कि यह केवल टीईटी का ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था का भी रिजल्ट है। कोचिग संस्थान या सरकारी विद्यालय मिलकर बच्चों का भविष्य संवारने के नाम पर ढोंग के अलावा और कुछ भी नहीं कर रहे हैं। केवल बलिया की बात करें तो यहां बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का स्तर निम्न है। शुरूआती दौर से ही बच्चों में नकल की प्रवृत्ति हावी हो जा रही है, इसलिए कि मोटी तनख्वाह लेने वाले शिक्षक भी पठन-पाठन के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से नहीं कर रहे हैं। प्राथमिक स्तर के लिए अयोग्य हुए 70 फीसद

टीईटी की परीक्षा के रिजल्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक बनने की मंशा पाले अभ्यार्थियों में 70 फीसद की हैसियत प्राथमिक स्तर के बच्चों को भी पढ़ाने लायक नहीं है। टीईटी की परीक्षा में शिक्षा मित्र सहित डीएलएड, बीटीसी व बीएड योग्यताधारी अभ्यर्थी शामिल हुए थे। टीईटी के प्राथमिक स्तर की परीक्षा में उसी स्तर से प्रश्न भी पूछे जाते हैं, लेकिन उसे भी सही तरीके से 70 फीसद अभ्यर्थी हल नहीं कर पाए। इस परीक्षा में सामान्य अभ्यार्थियों के लिए 60 प्रतिशत और ओबीसी व अन्य के लिए 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य था। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है।

Posted By: Jagran

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