इंदरपुर (बलिया) : शहर की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर मानक विहीन कोचिग सेंटर व कम्प्यूटर संस्थान चल रहे हैं। ये संस्थान आम लोगों के लिए आर्थिक दोहन का जरिया बन गए हैं तो शिक्षा देने के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। कोचिग संस्थान बच्चों व छात्र- छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

बिना पंजीयन के चलते कोचिग संस्थानों में संचालक अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं, जहां साइकिल व मोटरसाइकिल खड़ा करने की व्यवस्था तक नहीं है। खास बात यह है कि रोजगार परक शिक्षा देने के लिये ट्रेंड टीचर होना चाहिए पर ऐसा कहीं नहीं दिखता। अनुमान के मुताबिक ब्लाक चिलकहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में करीब चार दर्जन कोचिग सेंटर संचालित हो रहे हैं।

बताते चलें कि क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित कोचिग संस्थानों पर जिलाधिकारी का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है। कोचिग संस्थानों के संचालक भारी भरकम शुल्क तो लेते हैं लेकिन व्यवस्था के नाम पर वहां कुछ नहीं दिखता। बहुत से कोचिग संस्थानों का पंजीकरण भी नहीं है। यही नहीं कई कोचिग संस्थानों में फायर फाइटिग यंत्र भी नहीं लगाए गए हैं।

Posted By: Jagran

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