बलिया, जागरण संवाददाता। प्रेरणा पोर्टल की निगरानी में जिले के 104 शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए हैं। इससे परिषदीय विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था पर शासन स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। हर ब्लाक में खंड शिक्षा अधिकारी भी स्कूलों की निगरानी करते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में गायब रह रहे शिक्षकों पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से नकेल कसने की तैयारी है। 

स्कूलों में शिक्षकों के अब 30 मिनट अतिरिक्त समय देना होगा। प्रार्थना से 15 मिनट पहले पहुंचना होगा और छुट्टी के 15 मिनट के बाद स्कूल से जाना होगा। जो शिक्षक इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, उनपर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी है। 

गौरतलब है कि जिले में 2249 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें पढ़ने वाले 3.34 लाख बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सरकार हर माह करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन शिक्षकों की लापरवाही से ही अधिकांश विद्यालयों में नामांकन के सापेक्ष बच्चे उपस्थित नहीं रहते। 

यह है गाइडलाइन 

  • विद्यालय में उपस्थित होने में नियमितता और समय पालन।
  • धारा 29 की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित करना और उसे पूरा करना। 
  • समय सीमा के भीतर संपूर्ण पाठयक्रम को पूरा कराना। 
  • प्रत्येक बालक की शिक्षा ग्रहण करने के सामर्थ्य का निर्धारण करना और यथा अपेक्षित अतिरिक्त शिक्षण, यदि कोई हो जोड़ना। 
  • माता-पिता तथा संरक्षकों के साथ नियमित बैठकें करना और बालक की प्रगति आदि की जानकारी देना। 

निपुण का लक्ष्य प्राप्त करने पर जोर 

निपुण भारत योजना का मुख्य उद्देश्य आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को छात्रों के अंतर्गत विकसित करना है। इस योजना के माध्यम से सन 2026-27 तक तीसरी कक्षा के अंत तक छात्र को पढ़ने, लिखने एवं अंकगणित को सीखने की क्षमता विकसित करनी है। 

बीएसए ने दी जानकारी

बीएसए ने सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) आजमगढ़ के पत्र का हवाला देते हुए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्यालय में शिक्षकों की समय से नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराएं जिससे कि निपुण योजना के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। 

केवल उपस्थित रहना ही पर्याप्त नहीं

बीएसए बेसिक शिक्षा अधिकारी मनिराम सिंह ने कहा है कि विद्यालय में अध्यापक का उपस्थित पाया जाना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी मूल्यांकन किया जाए कि अध्यापक अपने दायित्वों का यथोचित पालन किए या नहीं। यह कक्षा में अध्ययनरत छात्रों के परीक्षण से स्पष्ट होगा। यदि छात्र की प्रगति असंतोषजनक है तो संबंधित शिक्षक का भी मूल्यांकन किया जाए। प्रथम बार चेतावनी और उसके बाद दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाए।

Edited By: Lovkush Singh

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट