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बलिया में बच्चों के सीक्रेट लेटर से खुला मिड-डे-मील स्कैम, डीएम ने भी कराई गुपचुप जांच तो सामने आई एक और बात

Published: Wed, 26 Aug 2026 10:40 PM (IST)

बच्चों की गोपनीय चिट्ठी से बलिया के ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में मिड-डे-मील योजना में 14 लाख रुपये की अनियमितता का खुलासा हुआ।

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HighLights

  1. बच्चों की गोपनीय चिट्ठी ने मिड-डे-मील घोटाले को उजागर किया।

  2. ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में 14 लाख रुपये की अनियमितता मिली।

  3. डीएम ने गुप्त जांच के बाद कार्रवाई का आदेश दिया।

मिलन गुप्ता, बलिया। बांसडीह ब्लाक में स्थित ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना में कथित अनियमितता का मामला बच्चों की एक गोपनीय चिट्ठी के जरिए सामने आया है। बच्चों ने जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह को पत्र भेजकर शिकायत की कि उन्हें मध्याह्न भोजन नहीं मिल रहा है।

कक्षा छह से आठ तक बच्चों ने एक पत्र में सामूहिक रूप से लिखा, ‘डीएम साहब, हम अपना नाम नहीं लिख सकते क्योंकि प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर पांडेय हम लोगों पर ही कार्रवाई कर देंगे। कृपया मामले की गोपनीय जांच कराइए।’

चिट्ठी भेजने से पहले बच्चों ने गूगल पर सर्च कर डीएम का पता निकाला और डाक से अपने स्वजन के माध्यम से इस चिट्ठी को प्रेषित कर दिया। जब यह चिट्ठी डीएम के हाथ लगी तो उन्होंने इसको गंभीरता से लिया।

उन्होंने गुप्त रुप से बीएसए मनीष कुमार सिंह व डीडीओ आनंद प्रकाश से इसकी जांच कराई। जांच में पता चला कि मौके पर बच्चे ही नहीं है, जबकि कागज में प्रतिदिन 200 बच्चों को मध्याह्न भोजन खिलाया जा रहा है। यही नहीं, जांच में यह भी पता चला कि दो वर्षों से यह खेल चल रहा है और करीब 14 लाख रुपये की अनियमितता की गई है।

पीएम पोषण अभियान के तहत कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को भी मध्याह्न भोजन देने का प्रविधान है लेकिन यहां नहीं दिया जा रहा। इस घटना में बच्चों की बुद्धिमानी और जागरूकता खास तौर पर सामने आती है। संसाधनों और उम्र की सीमाओं के बावजूद उन्होंने यह समझा कि समस्या को सही जगह तक पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने सीधे जिलाधिकारी को गोपनीय चिट्ठी लिखकर न केवल मध्याह्न भोजन न मिलने की शिकायत की, बल्कि अपनी पहचान छिपाने का आग्रह भी किया। इससे यह भी पता चलता है कि बच्चे अपने अधिकारों के प्रति सजग थे और उन्हें यह आशंका भी थी कि शिकायत करने पर दबाव बनाया जा सकता है। बच्चों की चिट्ठी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने कागजों में चल रही व्यवस्था और जमीन पर वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को उजागर किया है।

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन व निगरानी व्यवस्था को भी किया उजागर

इस पूरे मामले में बच्चों की जागरूकता के साथ-साथ प्रशासनिक निगरानी और विभागीय लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यदि प्रारंभिक जांच में करीब दो वर्षों से मध्याह्न भोजन नहीं मिलने और अभिलेखों में करीब 200 बच्चों के नाम पर भोजन वितरण दर्ज होने की बात सामने आई है, तो सवाल यह है कि संबंधित विभाग की नियमित निगरानी के दौरान यह गड़बड़ी पहले क्यों नहीं पकड़ी गई।

नियम यह कहता है कि विद्यालय में केवल खाना बन रहा है या नहीं, इतना देखना पर्याप्त नहीं है। अभिलेखों में खाद्यान्न का स्टाक रजिस्टर, दाल, तेल, नमक और अन्य सामग्री का स्टाक रजिस्टर, दैनिक छात्र उपस्थिति रजिस्टर, रसोइयों के भुगतान से संबंधित रिकार्ड, भोजन गुणवत्ता समेत अन्य का समय-समय पर सत्यापन जरूरी है, लेकिन यह दो वर्षों में क्यों नहीं किया गया, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों की एक गोपनीय चिट्ठी ने न सिर्फ भ्रष्टाचार को उजागर किया है बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी की व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

रसोइया को प्रधानाध्यापक दे रहा था 200 प्रतिदिन का मानदेय

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रसोइयों को प्रति महीने मानदेय 3000 रुपये का प्रविधान है। हालांकि प्रधानाध्याक रसोइए को प्रतिदिन 200 रुपये के हिसाब से भुगतान कर रहा था, यानी महीने में 6000 रुपये।

ऐसे स्कूलों तक पहुंचता है भोजन, प्रति बच्चे होता भुगतान

नामांकन के सापेक्ष उपस्थिति की रिपोर्ट महीने के अंत में बीएसए कार्यालय को भेजी जाती है। इसके बाद खाद्यान्न का आवंटन होता है। एफसीआइ से उठान के बाद कोटेदार के माध्यम से स्कूल को राशन भेज दिया है। प्राथमिक विद्यालय में एक बच्चे के लिए करीब 100 ग्राम जबकि माध्यमिक विद्यालय में 150 ग्राम राशन प्रतिदिन निर्धारित है।

राशन के अलावा अन्य सामग्री जैसे तेल, हल्दी समेत अन्य के लिए प्रति बच्चे कन्वर्जन कास्ट निर्धारित है जिसमें 06 रुपये 78 पैसे प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए जबकि माध्यमिक विद्यालय के बच्चों के लिए 10 रुपये 17 पैसे प्रति बच्चे तय है। उपभोग के आधार पर इनका भुगतान बीएसए के माध्यम से कर दिया जाता है। कक्षा 6-8 के लिए भोजन में निर्धारित पोषण मानक भी अलग से तय हैं।

बीईओ के साथ ही जांच के लिए टास्क फोर्स व छह डीसी एमडीएम फिर भी घपला

विद्यालयों में बीईओ के माध्यम से मध्याह्न भोजन का सत्यापन कराया जाता है। इसके अलावा टास्क फोर्स भी है जिनमें ब्लाक में मौजूद एमओआइसी, बीडीओ, मार्केटिंग इंस्पेक्टर व सीडीपीओ जांच करते हैं।

इनको पांच विद्यालय का जांच करने का लक्ष्य है, जबकि बीईओ 40 विद्यालय की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जनपद में छह डीसी एमडीएम हैं जो किसी भी विद्यालय में मध्याह्न भोजन व व्यवस्था की जांच कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि मध्याह्न भोजन में अनियमितता बरती गई है। अभी जांच चल रही है। इसके बाद प्रधानाध्याप पर एफआइआर भी दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

-मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी, बलिया।

 

ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज का निरीक्षण किया गया था। मौके पर बच्चे नहीं मिले। इसके बाद रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई। डीसी एमडीएम की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी कि उन्होंने जांच क्यों नहीं किया।

-मनीष कुमार सिंह, बीएसए, बलिया।

 

टीम जांच करने आई थी और जांच कर लौट भी गई। पिछले कुछ दिनों से मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा था, यह सत्य है।

-चंद्रशेखर पांडेय, प्रधानाचार्य, ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज।