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छत्तीसगढ़ में बलिया की गूंज, चार साहित्यकारों को मिला ‘साहित्य गौरव सम्मान’

Published: Fri, 18 Sep 2026 06:08 PM (IST)

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में बलिया के चार साहित्यकारों को 'साहित्य गौरव सम्मान' से नवाजा गया।

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HighLights

  1. बिलासपुर में बलिया के चार साहित्यकारों को सम्मान मिला।

  2. 'साहित्य गौरव सम्मान' से नवाजा गया, साहित्यिक जगत में खुशी।

  3. राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य पर गहन मंथन हुआ।

जागरण संवाददाता, बलिया। जिले की साहित्यिक पहचान को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली। विकास संस्कृति साहित्य अकादमी एवं विकास संस्कृति अभियंता अकादमी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन एवं विकास संस्कृति महोत्सव-2026 में बलिया के चार साहित्यकारों को ‘साहित्य गौरव सम्मान’ से नवाजा गया।

सम्मानित होने वालों में डॉ. सुनील कुमार ओझा, डॉ. आदित्य कुमार अंशु, फतेहचंद बेचैन और डॉ. रमाशंकर वर्मा मनहर शामिल हैं। समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक रहे।

साहित्य और तकनीकी क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने आयोजन में सहभागिता की। कार्यक्रम महान अभियंता एवं साहित्यकार डॉ. एम. विश्वेश्वरैया की 166वीं जयंती के अवसर पर इंजीनियर दिवस के रूप में भी आयोजित किया गया।

‘राष्ट्रकवि की अवधारणा’ पर दो दर्जन से अधिक शोधपत्र

राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘राष्ट्रकवि की अवधारणा और भारत के राष्ट्रकवि’ रहा। विषय पर दो दर्जन से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। बलिया के प्रोफेसर एवं दैनिक भास्कर के स्ट्रिंगर डॉ. सुनील कुमार ओझा ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार रखे। डॉ. आदित्य कुमार अंशु विशेष अतिथि रहे।

वहीं, फतेहचंद बेचैन और डॉ. रमाशंकर वर्मा मनहर ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। अधिवेशन में जिले के चारों साहित्यकारों को साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

एक ही राष्ट्रीय मंच पर बलिया के चार रचनाकारों को मिले सम्मान से साहित्यिक जगत में प्रसन्नता है। आयोजन में जिले की साहित्यिक परंपरा और रचनाकारों के योगदान को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य पर केंद्रित रही संगोष्ठी

संगोष्ठी में बलिया से जुड़े राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य पर विशेष चर्चा हुई। उनके महाकाव्य ‘आहुति’ और ‘वेदमूर्ति’ को आधार बनाकर डॉ. रविंद्र पूंजाराम ठाकरे द्वारा संपादित करीब 500 पृष्ठों की पुस्तक ‘राष्ट्रकवि की अवधारणा और भारत के राष्ट्रकवि’ का विमोचन किया गया।

‘आहुति’ महाकाव्य के संपादक डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह संजय ने भी कार्यक्रम में विचार रखे। शोधपत्रों के माध्यम से डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य, राष्ट्रीय चेतना और उनके रचनात्मक योगदान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

राष्ट्रीय चेतना पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन

कार्यक्रम में डॉ. मोतिम वर्मा गंगा की पुस्तक ‘राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य में अभिव्यक्त राष्ट्रीय चेतना’ का भी विमोचन हुआ। पुस्तक में डॉ. बृजेश सिंह की रचनाओं में व्यक्त राष्ट्रीय चेतना के स्वर और उनके साहित्यिक योगदान का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

हिंदी भवन के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा आयोजन के दौरान इंजीनियर एवं साहित्यकार तथा ‘कृष्ण चरित्र मानस’ के रचयिता 86 वर्षीय अमर नाथ त्यागी ने बिलासपुर में हिंदी भवन के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये दान करने की घोषणा की।