सुखपुरा (बलिया) : आषाढ़ बीत गया। सावन का पहला पखवारा भी बीतने को है बारिश जितना होना चाहिए उतना नहीं हुआ। कभी सावन के प्रारंभ में क्षेत्र के ताल तलैया, कुआं पानी से लबालब भर जाते थे। आज हालत यह है कि ताल तलैयों में पानी के स्थान पर केवल कीचड़ दिख रहा है। बारिश की कमी के चलते धान की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना से किसान काफी चिंतित हैं।

पानी के अभाव में पहले तो धान के बेहन ही सूखने लगे थे। किसी तरह पानी चलाकर किसानों ने धान की रोपाई की तो आज रोपे गए पौधे पीले पड़ने लगे हैं। खेतों में दरारे तक फटने लगी हैं। कहीं-कहीं तो खेतों में धान के पौधों की जगह घास ही घास दिखलाई पड़ रहा है। बिजली की अनियमित आपूर्ति व डीजल की महंगाई ने एक तो पहले ही किसानों की कमर तोड़कर रख दी है दूसरे मौसम भी किसानों के साथ धोखा ही दे रहा है। धान उत्पादक किसानों ने बताया 100 रुपए प्रति घंटे की दर पर पानी चलाकर धान की रोपाई तो किसी तरह कर ली गई लेकिन सूख रहे धान को बचाने की हिम्मत अब नहीं रह गई है। एक बीघा खेतों में सिंचाई के लिए 1200 से 1500 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं ऐसे में अब पाकेट जवाब दे रहा। क्षेत्र के नहरों में भी पानी का अभाव है। नहरों में पानी छोड़ा गया है लेकिन सुखपुरा व उसके समीप के गांवों तक पानी नहीं पहुंच रहा। कारण इसके पूर्व ही किसान पानी को घेर अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के प्रमुख धान उत्पादक किसानों ने प्रदेश सरकार से इस क्षेत्र विशेष को सूखा ग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत पहुंचाने की मांग की है।

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