बहराइच : अभ्यारण्य प्रेमियों के लिए खबर अच्छी है। अगर वे कतर्निया घूमने आएंगे तो उन्हें यहां नेपाली हाथियों के झुंड व गैंडे भी नजर आएंगे। नेपाल की ऊंची पहाड़ियों और सुरम्य घाटियों के बीच स्थित खूबसूरत जंगलों को छोड़कर आए हाथियों के झुंड अब कतर्निया वन्यजीव विहार का आकर्षण बढ़ा रहे हैं। दरअसल इस क्षेत्र की आबोहवा नेपाली हाथियों व गैंडों को खूब रास आ रही है। यही कारण है कि यहां नेपाली हाथियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। वन विभाग के अधिकारी इसे शुभ संकेत मान रहे हैं।

551 वर्ग किमी में फैले कतर्निया वन्यजीव प्रभाग का क्षेत्र नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से मिला हुआ है। दोनों जंगलों को अगर कुछ अलग करता है तो जंगलों के बीच नोमैंसलैंड की सीमा रेखा। बर्दिया नेशनल पार्क कतर्नियाघाट के जंगलों से कई गुना बड़ा है, लेकिन ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ियों पर स्थित होने के कारण यहां के वन्यजीवों को वह आहार नहीं मिल पाता, जो कतर्नियाघाट में उपलब्ध है। खासतौर से शाकाहारी जानवरों के लिए। यही कारण है कि नेपाल के हाथियों का झुंड अक्सर कतर्नियाघाट के जंगल की ओर चल पड़ता है। 30-35 की संख्या में इनके झुंड होते हैं। खासतौर पर जब गर्मियों में धूप तेज होती है और नेपाल की पहाड़ियां गलने लगती हैं, उस समय गजराज को कतर्निया की सुधि और आती है। नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से आए गैंडे आज भी गेरुआ नदी के आसपास विचरण करते देखे जा सकते हैं। इनकी संख्या आधा दर्जन से अधिक बताई जाती है।

गजराज के झुंड तो अक्सर कतर्निया की ओर रुख करते रहते हैं। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ जीपी ¨सह इस बात की पुष्टि करते हैं। वे कहते हैं कि नेपाली हाथियों व गैंडों को कतर्नियाघाट का दलदली इलाका रास आ रहा है। यहां पर भोजन आसानी से मिल जाता है, इसलिए नेपाली हाथियों को यहां की आबोहवा भा रही है।

Posted By: Jagran