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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 06, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अपनी लिपि भूल परिवर्तन की नई इबारत लिख रहे थारू

By JagranEdited By:
Published: Thu, 06 Dec 2018 12:00 AM (IST)

विजय द्विवेदी, बहराइच : परिवर्तन की नई इबारत लिख रहे जनजातीय थारू परिवार समय के साथ ही अपनी

अपनी लिपि भूल परिवर्तन की नई इबारत लिख रहे थारू
अपनी लिपि भूल परिवर्तन की नई इबारत लिख रहे थारू

विजय द्विवेदी, बहराइच : परिवर्तन की नई इबारत लिख रहे जनजातीय थारू परिवार समय के साथ ही अपनी पौराणिक लिपि को ही भूलते जा रहे हैं। वक्त के साथ आए बदलाव में इनकी वेशभूषा और रहन-सहन का परिवेश ही नहीं बदला है, बल्कि प्राथमिकताएं भी काफी कुछ बदल गई हैं। थारू युवा और युवतियां शैक्षिक और सामाजिक परिवर्तन का नया दौर शुरू कर चुके हैं। इसी परिवर्तन की आंधी में इनकी अपनी भाषा बीती बात बनकर रह गई है।

तराई के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, लखीमपुर व महाराजगंज जिलों में थारुओं की बड़ी आबादी निवास करती है। अकेले बहराइच जिले में ही इन परिवारों की आबादी तकरीबन 12 हजार होगी। मिहीपुरवा ब्लॉक में फकीरपुरी बर्दिया, आंबा, विशुनापुर, रमपुरवा, मटेही जैसे थारू बाहुल्य गांव हैं। काफी पहले जब थारू परिवार समाज की मुख्यधारा से हटकर अपने मिजाज की अलग ¨जदगी बसर करते थे तो इनके रहन-सहन की विलक्षण शैली के साथ ही तीज-त्योहार, नृत्य और पहनावे तो अलग होते ही थे। इनकी भाषा भी सामान्य लोगों से भिन्न थी। थारुओं की खुद की अपनी लिपि थी, जिसमें वह पढ़ते-लिखते और संवाद करते थे। आज भी थारू लिपि पर आधारित पांडुलिपियां थारू जनजाति गांवों में बुजुर्गों के पास मौजूद हैं। बुजुर्गों के हाथ के लिखे थारू लिपि के इश्तिहार उन्हीं के पीढ़ी के युवा न तो पढ़ पाते हैं और न समझ पाते हैं। थारुओं के उत्थान पर काम कर रहे देहात संस्था के जितेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि थारू लिपि के संरक्षण में सरकार बेपरवाह है। किसी स्तर का शैक्षिक अथवा अनुसंधानगत प्रयास भी नहीं हो पाया है, जिससे पांडुलिपियों को सुरक्षित रखकर इस जनजातीय लिपि को जीवंत रखा जा सके। फकीरपुरी के थारू जनजाति के 60 वर्षीय रामकुमार कहते हैं कि थारू लिपि की इबारतों को लिखने वाले बुजुर्ग थारू जब दिवंगत होते हैं तो उनकी लिखी पांडुलिपियां भी चिता पर जला दी जाती हैं। इसी के चलते थारू लिपि धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है।