संसू, बहराइच : किसान की स्थिति चिताजनक है। न तो फसलों का वाजिब दाम उन्हें मिल पा रहा है, न ही सरकारी सहायता। एक तरफ कृषि यंत्र एवं बीजों पर किसानों को भारी मात्रा में सब्सिडी दी जाती है। वहीं दूसरी ओर उसी सब्सिडी में सरकार जीएसटी की प्रतिशत को समाहित कर किसानों को सब्सिडी की राशि प्रदान करती है, जिससे किसानों को लाभ कम हानि ज्यादा होती है। किसानों ने आने वाले बजट में कृषि उपकरण पर लगने वाले जीएसटी या करों पर भी समानांतर सब्सिडी देने की बात कही है। किसानों ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सब्सिडी की राशि में ही जीएसटी को निहित किया जाय। इनसेट एक तरफ प्राकृतिक आपदा से किसान परेशान है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। जब धान की उपज अच्छी हुई, तो सही ढंग से खरीदारी नहीं हो पा रही है। सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्रभात कुमार - फोटो 20 सरकार द्वारा किसानों के लिए प्रति यूनिट बिजली का दर निर्धारित है, लेकिन जो दर निर्धारित है। उससे कहीं ज्यादा दर पर राशि की वसूली की जाती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। धान खरीदारी स्कीम को और पारदर्शी बनाने की भी जरूरत है। अमर कुमार - फोटो - 21 सरकार किसानों को छह हजार रुपये की राशि पेंशन के तौर पर या आर्थिक मदद के रूप में सालाना देती है। यह राशि काफी कम है। इसे बढ़ाने की आवश्यकता है। सुशील गुप्ता फोटो - 22 एमएसपी (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) पर अनाज का लेन देन हो। साथ ही सरकार की योजनाओं में भी किसानों को वरीयता मिलनी चाहिए। सरकार आय दोगुनी करने का दावा तो कर रही है, लेकिन उसके मुताबिक उसे सुविधाएं नहीं दे रही है। किसानों की सुविधाओं के लिए बजट में ज्यादा से ज्यादा प्रावधान हो। चंदन पाठक फोटो - 23

Posted By: Jagran

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