बहराइच : तराई के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। किसानों को निजी संसाधनों के जरिए रकम खर्च कर खरीफ फसलों की ¨सचाई नहीं करनी होगी,बल्कि सितंबर माह तक फसलों के अनुकूल तराई में मानसूनी बारिश होगी। अब तक हुई बारिश सामान्य से ज्यादा रही। केंद्रीय मौसम वेधशाला की ओर जारी पूर्वानुमान सटीक रहा तो फसलों को सूखे की मार से बचाने के लिए अन्नदाताओं को जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।

बंगाल की खाड़ी से मानसून कोलकाता होते हुए बिहार से उप्र के वाराणसी से तराई क्षेत्र में पहुंचता है। इस बार 25 जून से मानसूनी बारिश का पूर्वानुमान लगाया गया था, लेकिन 15 जुलाई तक मानसून निष्क्रिय रहा। 18 जुलाई से मानसून ने तराई में दस्तक दिया। इसके बाद लगातार बारिश होती रही। जुलाई माह में 335 मिमी बारिश रिकार्ड की गई, जो सामान्य से 135 मिमी ज्यादा रही। अगस्त माह के पहले सप्ताह में भी बारिश से तराई तर-ब-तर हुई। अब तक 104 मिमी बारिश हो चुकी है। नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद के मौसम पर्यवेक्षक शंख माधव तिवारी के मुताबिक अगस्त माह में भी सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। केंद्रीय मौसम वेधशाला पुणे की ओर से अगस्त व सितंबर माह में भी फसलों के अनुसार मानसूनी बारिश होने की संभावना जताई गई है। अगर ऐसा रहा तो फसलों का उत्पादन अच्छा होगा। किसानों को फसलों की ¨सचाई के लिए निजी संसाधनों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

10, 11 व 12 अगस्त को भारी बारिश की संभावना

बहराइच : मौसम विभाग ने 10,11 व 12 अगस्त को तराई क्षेत्र में तेज बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। 10 किमी की रफ्तार से पुरवा हवाओं के साथ झमाझम बारिश होगी। जबकि गुरुवार को भी रिमझिम फुहारे पड़ेंगी। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो बारिश कम होने से दलहनी फसलों को काफी फायदा पहुंचेगा।

By Jagran