बहराइच : ¨जदगी की दुश्वारियां झेल रहे गरीबों के आवास आवंटन में जमकर 'खेल' हुआ है। पंचायत और नौकरशाही की गठजोड़ में भले ही गरीब लाभार्थियों को आवास का लाभ न मिला हो, लेकिन दुनिया से विदा हो चुके ग्रामीणों के नाम आवास जरूर आवंटित कर दिया गया है। यही नहीं, कुछ ऐसे लोगों के नाम आवास आवंटित कर पैसा भी निकाल लिया गया है, जिन्हें जानकारी ही नहीं है। यह अनूठी कहानी महसी ब्लॉक के मासाडीह ग्रामपंचायत से जुड़ी है। डीएम ने पीडी को जांच के आदेश दिए हैं।

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत महसी ब्लॉक के मासाडीह गांव में गरीबों को आवास मुहैया कराया गया है। योजना का लाभ उनको मिला है, जिनकी वर्षों पहले मौत हो चुकी है या फिर फर्जी तरीके से पैसा निकाल लिया गया है और लाभार्थियों को इसका पता नहीं है। गांव के रामनरेश पुत्र रामसरन की चार साल पहले मौत हो चुकी है और इन्हें आवास आवंटित कर दिया गया है। रामनरेश ही नहीं, रामपाल पुत्र बंशी, शंभू पुत्र रंगीलाल व श्यामलाल पुत्र रामनरायन भी परलोक सिधार चुके हैं, लेकिन इन्हें रहने के लिए आवास आवंटित किया गया है। गांव के राजितराम की माने तो इन मृतकों का पैसा भी निकल चुका है। यही नहीं सामाजिक, आर्थिक, जातिगत जनगणना 2011 के अनुसार बनाई गई पात्रता सूची में राजितराम पुत्र शंभू का क्रमांक संख्या 11, रामकुमार पुत्र कन्हैया लाल का क्रमांक संख्या 24, साहबे आलम पुत्र जाकिर अली का सूची में क्रमांक 27 पर नाम दर्ज है। शौकत पुत्र सालारू का सूची में क्रमांक 39, अनिल पुत्र छोटेलाल का 44, हरिश्चंद्र पुत्र नरायन का क्रमांक 64, हृदयराम पुत्र बाने का क्रमांक 101 व सीताराम पुत्र पांचू का सूची में क्रमांक 103 पर नाम दर्ज है। गांव के लोगों की माने तो ऐसे कई लोग हैं, जिनके नाम आवास आवंटित हो गए हैं और पैसा भी निकल गया है। उन्हें जानकारी नहीं है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस बाबत शिकायत भी की है। डीएम ने इसकी जांच पीडी को सौंपी है। इससे पहले पीडी ने बीडीओ महसी को एफआईआर दर्ज कराने का आदेश 28 अगस्त को दिया था। 14 दिन बाद भी न तो एफआईआर दर्ज कराई गई है और न ही जांच मौके पर शुरू हुई है। पीडी अनिल ¨सह ने बताया कि मृतकों के नाम आवास आवंटन की जानकारी उन्हें है। आवास आवंटन में बरती गई अनियमितता की शिकायत मिली है। जांच की जा रही है।

Posted By: Jagran