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विजय द्विवेदी, बहराइच : मेरी कोशिश को समझो, मेरे हिम्मत के करो सजदे। मैंने जलाई है शमां घुप अंधेरे के खिलाफ। जी हां, चाहे सामाजिक कुरीतियां हों या फिर मानव तस्करी की बात हो या फिर बालश्रम, बाल विवाह व स्वरक्षा के प्रति जागरूक करने का मामला हो। बहराइच जिले के नवाबगंज के केवलपुर रुपईडीहा की फूलजहां ने कुछ ऐसा अभियान छेड़ा है कि बड़े-बड़े उसके हौसले का लोहा मानने लगे हैं। उसका अभियान रंग भी ला रहा है।

गरीब परिवार में जन्मी फूलजहां के पिता मुहम्मद जलालुद्दीन राजगीर मिस्त्री व मां नसरुननिशा सिर्फ साक्षर हैं। एक बिसवा जमीन भी इनके पास नहीं है। चार बहनों व दो भाइयों में फूलजहां दूसरे नंबर पर है। अपने चाचा के आवास के पीछे परिवार के साथ टिनशेड में रहने वाली फूलजहां जब नौवीं क्लास में थी तो देहात संस्था द्वारा गठित एंटी ट्रैफिकिग एक्शन ग्रुप (आग) से जुड़ गई और मानव तस्करों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। हाईस्कूल पास किया तो आर्थिक विपन्नता के चलते मां-बाप ने आगे की पढ़ाई से रोक दिया, लेकिन बेटी की जिद के आगे आखिरकार उन्हें झुकना पड़ा और आचार्य रमेश चंद्र ग‌र्ल्स इंटर कॉलेज में फिर दाखिला करा दिया। फूलजहां इंटर पास हुई तो मां-बाप को उसके शादी की चिता सताने लगी और रिश्ते भी खोजना शुरू कर दिया। फूलजहां को जब इसका पता चला तो उसने दमदारी के साथ पहले पढ़ाई फिर शादी करने की बात मां-बाप के सामने रखी। बेटी के हौसले को देखकर एक बार फिर मां-बाप ने उसकी बात मानकर रिश्ता खोजना बंद कर दिया और पढ़ाई पर राजी हो गए। पढ़ाई के साथ फूलजहां रुपईडीहा व आसपास के गांवों में बाल विवाह, बालश्रम, मानव तस्करी, घरेलू हिसा जैसी कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की मुहिम चला रही है। प्रदेशस्तरीय मानव तस्करी रोधी सम्मेलन में उसे सम्मानित भी किया जा चुका है।

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वाट्सप ग्रुप के जरिए चला रहीं मुहिम

गांव की बेटी सिर्फ गांव तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि दूरदराज बैठी बेटियों को भी उनके अधिकार के बारे में जागरूक कर रही है। वाट्सप ग्रुप के जरिए फूलजहां मानव तस्करी, बाल विवाह व बालश्रम के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रही है। लगभग 500 बालिकाएं ग्रुप पर जुड़ी हुई हैं। देश ही नहीं विदेश में भी बज रहा डंका भारत की यह बेटी नेपाल में भी बाल विवाह के खिलाफ अभियान छेड़कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। देहात संस्था के कार्यकारी डॉ.जितेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि उसके हिम्मत व हौसले को देखकर संस्था उसकी शिक्षा में सहयोग करेगी। बकौल फूलजहां आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए नर्स बनना चाहती है।

Posted By: Jagran

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