बहराइच : गुरुवार को बहराइच से बलरामपुर के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन का मंडल रेल प्रबंधक डा. मोनिका अग्निहोत्री ने निरीक्षण किया। उन्होंने स्टेशन पर उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली। लखनऊ-गोंडा-बहराइच खंड के मध्य निरीक्षण एवं बहराइच-भिनगा-श्रावस्ती-खलीलाबाद के मध्य नई लाइन के प्रस्तावित कार्य का जायजा लिया। बहराइच-नानपारा और नैपालगंज बीजी आमान परिवर्तन की हकीकत परखी।

उन्होंने गंगाधाम, बनगई, विशेश्वरगंज, पयागपुर, चिलवरिया एवं बहराइच के मध्य स्टेशन भवन, पुलों, कर्वों, समपारों और रेलवे ट्रैक को देखा। बहराइच स्टेशन पर यात्री सुविधाओं, साफ-सफाई, सुरक्षा, संरक्षा, पेयजल आपूर्ति, प्रतीक्षालय, फुट ओवर ब्रिज का निरीक्षण किया।

अधिकारियों को स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाने का निर्देश दिया। बहराइच-श्रावस्ती-भिनगा-खलीलाबाद के मध्य 240 किलोमीटर नई लाइन के एलाइनमेंट प्लान की समीक्षा की। उन्होंने नई परियोजना में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने बहराइच-नानपारा-नेपालगंज रोड के बीजी आमान परिवर्तन कार्य के विडो ट्रेलिग निरीक्षण किया। आखिर कब पूरा होगा मैलानी-नानपारा ब्राडगेज का स्वप्न

वन विभाग की आपत्ति के बाद बंद हुई मैलानी-नानपारा रेल सेवा जनप्रतिनिधियों के बड़े प्रयास से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के साथ शुरू तो हुई, लेकिन ब्राडगेज लाइन का स्वप्न अब भी अधूरा है।

तराई के इस इलाके में पूर्वांचल की बहुतायत आबादी रहती है। बहराइच से नेपालगंज रूट पर ब्राडगेज का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि नानपारा-मैलानी प्रखंड पर अब तक जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते तक ब्राडगेज के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में रोष बढ़ रहा है।

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मलकीत सिंह चीमा ने बताया कि वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जनप्रतिनिधियों ने ब्राडगेज के लिए आवाज नहीं उठाई है। ब्राडगेज होने से क्षेत्र का विकास होगा और लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा। देहात संस्था के कार्यकर्ता गीता प्रसाद ने कहा कि मैलानी-नानपारा रूट पर पूर्वांचल की आधी से ज्यादा आबादी ट्रेन से सफर कर बिहार, गोरखपुर, देवरिया, सीवान सहित विभिन्न प्रांतों के लिए ट्रेन से यात्रा करते हैं। ब्राडगेज होने से यात्रियों को सीधा इसका लाभ मिलेगा।

इस संबंध में सांसद अक्षयवरलाल गोंड ने बताया कि वे रेल मंत्रालय के अधिकारियों से बराबर बात कर रहे हैं। कई बार पत्र भी लिखा है, लेकिन वन, पर्यावरण एवं रेल मंत्रालय इसकी मंजूरी नहीं दे रहा है। वे प्रयास करते रहेंगे। उम्मीद है कि कोई न कोई रास्ता निकलेगा।

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