बहराइच (जेएनएन)। आज ज्यादातर लोग किसी न किसी मनोविकार से पीड़ित है। अब सामजिक बदलावों को समझ कर बीमारियों के उपचार की जऱूरत है। ऐसे में महिला हिंसा, घरेलू हिंसा, आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों के उपचार में मनोचिकित्सा सहायक हो सकती है। बहराइच आध्यात्मिक भूमि पर आज एक ऐसा ही सेमिनार अखिल भारतीय निजी मनोचिकित्सक संघ ने आयोजित किया। सेमिनार में मुख्य अतिथि सूबे के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा रहें। विशेषज्ञों ने मनोरोग से बचाव के सरल उपायों की जानकारी दी। 

सहकारिता मंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में मनोचिकित्सक अध्यात्म में मनोरोग का इलाज खोज रहे है। यह भारतीय संस्कृति के लिए अत्यंत सुखद है। बहराइच में सेमिनार का आयोजन इसकी सार्थकता को बढ़ाता है। चंडीगढ़ से आए मनोचिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि मनोचिकित्सक सामाजिक बदलाव को समझ कर उपचार कर सकते है। समाज में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाएं, आत्महत्या मनोरोग के लक्षण है। अध्यात्म से ऐसे कई मनोरोगों का निदान संभव है। संस्था सचिव डॉ. एमएस रेड्डी ने कहा कि आज की लाइफ स्टाइल धूम्रपान, शराब का सेवन, काम करने के घंटो की अनियमितता मानसिक तनाव को जन्म देता है। इसे खानपान व व्यायाम से दूर किया जा सकता है। अध्यात्म मनोरोगी व मनोचिकित्सक के बीच एक सेतु का काम करता है। केरल से आए मनोचिकित्सक डॉ. दिनेश नरायणन ने बताया कि देश में लगभग 60 फीसद लोग किसी न किसी मनोविकार से पीड़ति है। सही जानकारी के अभाव में हम कई लोगों को खो रहे है। आयोजक सचिव डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि संस्था में देश के लगभग दो हजार मनोचिकित्सक जुड़े है। सेमिनार में डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, आइएमए से डॉ. शिशिर अग्रवाल, डॉ. रूपम अग्रवाल, डॉ. एके तिवारी, डॉ. अनिल केडिया, डॉ. शैलेष जायसवाल, एनसी बाबा, डॉ. प्रमोद अग्रवाल, डॉ. अंबुज पांडेय व डॉ. सुभाष चंद्रा, अरूण मिश्रा समेत अन्य मौजूद रहे।   

Posted By: Nawal Mishra