यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 21, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मेनिनजाइटिस व बर्थ एसफिक्सिया से दो बच्चों की मौत
तराई में बदलते मौसम के बीच बुखार व बर्थ एसफिक्सिया का कहर थम नहीं रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती ...और पढ़ें

बहराइच : तराई में बदलते मौसम के बीच बुखार व बर्थ एसफिक्सिया का कहर थम नहीं रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए दो और बच्चों की शनिवार को मौत हो गई। विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 14 बच्चों को चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया गया है। तीन की हालत गंभीर होने पर उन्हें ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर किया गया है।
रानीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सुख नदिया निवासी समीर अहमद (5) पुत्र अमीन अहमद कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित चल रहा था। देर शाम झटका आने से हालत और बिगड़ गई। जिला अस्पताल में पीड़ित को भर्ती कराया गया। हालत को देखते हुए उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में रखा गया। लगभग एक घंटे बाद ही झटकों के साथ उसकी मौत हो गई। हुजूरपुर थाना क्षेत्र के पुरैना चौराहा निवासी जगदीश ने बर्थ एसफिक्सिया से पीड़ित नवजात पुत्री को भी चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया था। उसकी भी मौत हो गई। बुखार,डायरिया व अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मतीन (8), सलीम (10), शहीना (3), मोहित (3), ननकू (5), अंकुश (2), रिबजा (6), चांदनी (7), अंकित (6) समेत 14 बच्चों को और भर्ती कराया गया है। चिल्ड्रेन वार्ड प्रभारी डॉ. केके वर्मा ने बताया कि बेहोशी के हालत में बच्चों को यहां भर्ती कराया गया था। काफी प्रयास के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। झोलाछाप के चक्कर में बिगड़ रही हालत चिकित्सकों का कहना है कि जिला अस्पताल में अधिकांश पीड़ित बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर हाई एंटीबायोटिक दवाएं चलाते हैं। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। इलाज का यह तरीका फायदे से ज्यादा बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। बीमार होने पर सीधे अस्पताल अभिभावक बच्चे को लाएं तो उनका जीवन सुरक्षित रहे।
