बहराइच : मौसम बदलने के साथ ही मच्छरों का कहर शुरू हो गया है। मच्छरों के काटने से डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफ्लाइटिस व मलेरिया रोग की चपेट में लोग तेजी से आ रहे हैं। इनमें सर्वाधिक पांच से 10 आयुवर्ग के बच्चे शामिल हैं। चिकित्सकों का कहना है कि 80 फीसदी बीमारी की मुख्य वजह मच्छर होते हैं। थोड़ी सी एहतियात बरतने पर इनसे बचा जा सकता है, लेकिन लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है। इनमें एडीज व क्यूलेक्स से फैलने वाला डेंगू व जापानी इंसेफ्लाइटिस बीमारी की अनदेखी पंगु भी बना सकती है। लिहाजा बुखार, झटका व बेहोशी आने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। पानी जमा होगा जहां, मच्छर पनपेंगे वहां

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. पारितोष तिवारी कहते हैं कि पानी जहां भी जमा होगा, मच्छर वहीं पनपेंगे। खासकर रुके पानी में ही प्रजनन होता है। हैंडपंप व घर के आसपास पानी का ठहराव न होने दें, क्योंकि मलेरिया बुखार का वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर पानी से ही पनपता है। इनसे रहें दूर

बीमार मरीज को पेट के बल न लिटाएं। बेहोशी या फिर झटके आने के समय कुछ खिलाएं न। खुले मैदान या खेतों में शौच न जाएं। झोलाछाप डॉक्टरों से बचें। तालाब या पोखरों में जलकुंभी पैदा न होने दें। तेज बुखार होने पर पानी से बदन को पोछते रहें। फल व सब्जियों को धोने के बाद ही खाएं। इन लक्षणों की न करें अनदेखी अचानक तेज बुखार आना।

मरीज का पूरी तरह से होशों-हवाश में न होना।

मरीज के व्यवहार में अचानक परिवर्तन का आना।

मरीज को पहली बार झटके आना। ये करें उपाय

दीमागी बुखार का टीका लगवाएं

मच्छर मारने के लिए धुएं का उपयोग करें

मच्छरदानी व मच्छर अगरबत्ती का उपयोग करें

पूरे बांह के कपड़े पहनें

सूकरों को घर से दूर रखें

इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी पिएं

जागरूकता ही मच्छरजनित रोगों से बचाव का प्रमुख हथियार है। मच्छरदानी का उपयोग करने के साथ ही अपने आसपास पानी न ठहरने दें। वे कहते हैं कि इस समय बुखार व झटकों को नजर अंदाज न करें न ही झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े। डॉ. विकास ¨सह, संक्रामक रोग प्रभारी

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