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संसू, बहराइच : जिला अस्पताल में बुधवार को एंबुलेंस न मिलने से रिसिया थाना क्षेत्र के नौवा गांव के एक मासूम की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। ढाई घंटे तक बेटे को गोद में लेकर मां-बाप भटकते रहे, लेकिन एंबुलेंस कर्मियों का दिल नहीं पसीजा। एंबुलेस में तैनात कर्मी वाहन में लगे ऑक्सीजन व अन्य सुविधाओं के नाम पर पैसों की मांग करते रहे और बच्चे की जान बचाने को लेकर परिवारजन गिड़गिड़ाते रहे। ढाई घंटे तक चले इस खेल के दौरान आखिरकार मासूम की जान ही चली गई।

नौवा गांव के दिनेश कुमार के दो वर्षीय पुत्र सचिन को दिमागी बुखार की शिकायत पर सोमवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को सचिन की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया। परिवारजनों का आरोप है कि बेटे को लखनऊ ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया गया तो एक घंटे बाद एंबुलेंस भेजने की बात कही गई। इस दौरान जब एंबुलेंस आई तो उस पर तैनात कर्मी वाहन में लगे ऑक्सीजन व अन्य सुविधा के नाम पर पैसों की मांग करने लगे। आरोप है कि पैसे देने में असमर्थता जताने पर कर्मी टाल मटोल करते रहे। इस दौरान ढाई घंटे बीत गए। जब तक दूसरे एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती, मासूम की मौत हो गई। बच्चे का शव लेकर परिवार के लोग सिस्टम व शासन को कोसते हुए रोते-बिलखते घर चले गए।

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इनसेट

एंबुलेंस में मरीज को मिलने वाले ऑक्सीजन का कोई पैसा नहीं पड़ता है। अगर कर्मियों ने पैसे की मांग की है तो यह जांच का विषय है। जांच कराई जाएगी। अगर पीड़ित के आरोप की पुष्टि होती है तो कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ.एसके सिंह, सीएमओ बहराइच

Posted By: Jagran

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