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बहराइच में मछुआ शादी अनुदान योजना जटिल नियमों की भेंट चढ़ी, एक साल में एक भी आवेदन नहीं

Published: Sat, 06 Jun 2026 07:30 PM (IST)

बहराइच में मछुआ समुदाय की बेटियों के लिए शुरू की गई शादी अनुदान योजना जटिल नियमों के कारण एक साल ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मछुआ समुदाय की बेटियों के लिए शादी अनुदान योजना।

  2. जटिल नियमों के कारण एक साल में शून्य आवेदन।

  3. योजना को सरल बनाने और प्रचार की मांग।

राजितराम निषाद, बहराइच। सरकार की ओर से मछुआ समुदाय की बेटियों की शादी के लिए शुरू की गई अनुदान योजना नियमों की जटिलता में उलझ गई है। योजना के शुरू होने के एक वर्ष का अधिक समय बीतने के बाद भी विभाग के पास एक भी आवेदन नहीं आए हैं। ऐसे में समुदाय की बेटियों के हाथ सरकारी इमदाद से कैसे पीले होंगे।

पिछले वर्ष 2025 में मछुआ समुदाय की गरीब बेटियों के लिए शादी अनुदान योजना शुरू की गई है। आवेदन के साथ विवाह का पंजीकरण, शादी की जिओ टैग फोटो, आय, जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज लगाने होंगे।

आवेदक को श्रम विभाग, समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से कोई दूसरी योजना का लाभ न लेने का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी देना होगा।

परिवार की आय दो लाख से कम होनी चाहिए। नियम जटिल होने के कारण एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी विभागीय पोर्टल पर एक भी आवेदन नहीं आए हैं।

इसमें आर्थिक रूप से कमजोर, मत्स्य पालन या व्यवसाय से जुड़े लोगों की बेटियों की शादी के लिए 51 हजार रुपये अनुदान मिलना है। 35 हजार सीधे कन्या के खाते में, 10 हजार कपड़े, बर्तन व 6000 रुपये विवाह आयोजन के लिए खर्च किए जाएंगे।

इन्हें मिलेगा लाभ

केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, धीमर, कश्यप, मांझी, कहार, रैकवार, गोड़िया, बाथम, तुरैहा आदि को लाभ मिलेगा।

योजना पर बोले समाज के लोग

पंकज कुमार निषाद का कहना है कि सरकार को नियमों में ढील देनी चाहिए। अन्य शादी योजनाओं की तरह इसमें भी शादी कार्ड मान्य होना चाहिए।

अधिवक्ता हरिओम निषाद ने कहा कि योजनाएं सिर्फ फाइलों में चल रही हैं।

दृगपाल निषाद ने बताया कि जानकारी का अभाव सबसे बड़ी समस्या है।

दीपक कश्यप ने कहा कि यदि इसे भी सामान्य शादी योजना की तरह सरल बना दिया जाए तो पात्र परिवारों को लाभ मिल सकेगा।

मछुआ समुदाय शादी योजना का प्रचार-प्रसार कराया जाता है। जो भी आवेदन आएंगे, उस पर चयन समिति विचार करेगी। लाभार्थी का चयन होने के बाद विभाग से बजट स्वीकृत कराकर संबंधित को योजना का लाभ दिया जाएगा।

-बाबूराम, प्रभारी सहायक निदेशक मत्स्य