बहराइच: सामाजिक संवेदना के जीवंत होने का ही असर है कि यहां अभी बाल एवं किशोर गृह की आवश्यकता नहीं पड़ी है। यहां कोरोना के चलते भले ही एक नौनिहाल माता-पिता दोनों के खोने के कारण अनाथ हो गया, लेकिन उसे भी बाल गृह जाने की नौबत नहीं आई क्योंकि उसके चाचा ने उसे अपने संरक्षण में ले लिया। उसे चाचा से पिता का लाड़ और चाची से मां का दुलार मिल रहा है। उसकी चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा का प्रबंध किया गया है।

यूं तो बहराइच जिले में 36 बच्चों को कोरोना के कारण अपनी मां या पिता में से एक को खोना पड़ा, लेकिन दूसरे के होने से देखरेख की समस्या नहीं आई। जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार सिंह का कहना है कि सभी बच्चों को शिक्षा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत तीन माह की रकम 12 हजार रुपये प्रत्येक बच्चे के खाते में भेज दी गई है। यह राशि 18 साल की उम्र अथवा इंटरमीडिएट पास करने तक दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि की व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

-----इनसेट------ शिक्षा व शादी का भी प्रबंध:

योजना के तहत चिह्नित बालिकाओं के शादी के लिए एक लाख एक हजार रुपये दिए जाएंगे। कक्षा-नौ या इससे ऊपर की कक्षा में श्रेणी में आने वाले अथवा व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे 18 साल तक के बच्चों को टैबलेट अथवा लैपटाप की सुविधा दी जाएगी। कक्षा छह से 12 तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों व कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में निश्शुल्क प्रवेश कराया जा सकेगा। 11 से 18 साल के बच्चों की कक्षा-12 तक की मुफ्त शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में भी प्रवेश कराया जा सकेगा। वर्जन:::

इस जिले में एक ही बच्चा अनाथ हुआ है। उसे भी अपने सगे चाचा का संरक्षण हासिल हो गया है। यहां बाल संरक्षण गृह की जरूरत नहीं दिख रही है और पहले भी बाल एवं किशोर गृह की जरूरत नहीं पड़ी थी।

-विनय सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी बहराइच

Edited By: Jagran